केन-वेतवा परियोजना और आदिवासी विस्थापन को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच पन्ना टाइगर रिजर्व में कांग्रेस नेताओं की एंट्री अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन गई है। टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने PCC चीफ Jitu Patwari, युवा कांग्रेस नेता अभिषेक परमार समेत 20 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर कोर एरिया में बिना अनुमति प्रवेश करने का मामला दर्ज किया है। वन विभाग की इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला
पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 27 और 29 सहित भारतीय वन अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि कोर क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है, क्योंकि यह इलाका वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक मामले की जांच शुरू कर दी गई है और घटनास्थल से जुड़े वीडियो व अन्य साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहा है।
कांग्रेस ने कार्रवाई को बताया राजनीतिक दबाव
वहीं कांग्रेस नेताओं ने वन विभाग की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव की रणनीति बताया है। कांग्रेस का कहना है कि नेता केवल विस्थापित ग्रामीणों और आंदोलनकारियों की समस्याएं सुनने पहुंचे थे तथा किसी भी प्रकार से वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने या नियम तोड़ने की मंशा नहीं थी। इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा इसे कानून उल्लंघन बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे आदिवासियों की आवाज दबाने का प्रयास करार दे रही है। केन-वेतवा परियोजना, विस्थापन और जंगल अधिकारों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक संघर्ष का रूप लेता नजर आ रहा है।