पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील का असर अब देशभर में दिखाई देने लगा है। केंद्र और राज्यों के कई बड़े नेताओं ने फ्यूल खपत कम करने के लिए काफिलों की गाड़ियां घटाने, मेट्रो और इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं।
अमित शाह और राजनाथ सिंह ने घटाए काफिले
प्रधानमंत्री की अपील के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह छोटे काफिलों के साथ अपने आवास से रवाना हुए। इसे ऊर्जा बचत और ईंधन संरक्षण की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है।
यूपी में योगी सरकार का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी काफिलों में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही है। राज्य में “नो व्हीकल डे” मनाने की भी अपील की गई है।
एमपी में मोहन यादव ने घटाईं गाड़ियां
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है। साथ ही सरकार ने वाहन रैलियों और बड़े जुलूसों पर रोक लगाने के निर्देश भी जारी किए हैं।
दिल्ली में कारपूलिंग और मेट्रो पर जोर
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकारी कार्यों में कम से कम वाहनों का उपयोग किया जाएगा। मंत्री Ashish Sood और Kapil Mishra मेट्रो से अपने दफ्तर पहुंचे। सरकार ने कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने का फैसला लिया है।
राजस्थान और महाराष्ट्र में भी सख्ती
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचने के निर्देश दिए हैं। वहीं महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis के कार्यालय से सरकारी विमानों के इस्तेमाल के लिए पूर्व अनुमति जरूरी कर दी गई है।
गुजरात और बिहार में भी दिखा असर
गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के काफिले को घटाकर केवल 3 गाड़ियों तक सीमित कर दिया गया है। वहीं बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल शुरू किया है। कई मंत्रियों ने भी ईंधन बचाने की इस पहल का समर्थन किया है।
ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे समय में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से उठाए जा रहे ये कदम ईंधन बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।