बीते दिन सूरत के सेशन कोर्ट द्वारा राहुल गांधी मानहानि केस में दोषी करार दिए गए थे (Rahul Gandhi Defamation Case)। कोर्ट ने राहुल को 2 साल की सजा सुनाई थी, और तुरंत ही 15000 के मुचलके पर उन्हे जमानत भी मिल गई थी। इसी कड़ी में शुक्रवार को राहुल गांधी को सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी को अयोग्य करार बता दिया है। जिसके चलते राहुल गांधी को अपनी लोकसभा सदस्यता से हाथ धोना पड़ा है।
लोकसभा सचिवालय का एक्शन
लोकसभा सचिवालय ने एक नोटिफिकेशन जारी कर केरला के वायनाड से सांसद राहुल गांधी को अयोग्य करार देते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता को खारिज कर दिया है। जिसके चलते राहुल गांधी लोकसभा से अयोग्य घोषित हो गए हैं।
बता दें कि जनप्रतिनिधि कानून के मुताबिक अगर किसी सांसद और विधायक को किसी भी मामले में 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होती है, तो ऐसे में उसकी सदस्यता रद्द हो जाती है। इतना ही नहीं सजा का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी सांसद या विधायक 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहते है।

क्या था पूरा मामला (Rahul Gandhi Defamation Case)
राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने 2019 के चुनाव के समय कर्नाटक के कोलार में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि “कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है?” राहुल के इस बयान पर भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी (Purnesh Modi) ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि इस विवादास्पद टिप्पणी ने पूरे मोदी समुदाय को बदनाम किया था।
2013 में राहुल ने फाड़ा था अध्यादेश
आपको बता दें कि 2013 में जब सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने फैसला लिया था कि सांसद या विधायक को 2 साल या उससे ज्यादा की अगर सजा सुनाई जाती है तो उनकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी जाएगी। उस वक्त चारा घोटाले में फैसला आने वाला था। चारा घोटाला में फंसे लालू प्रसाद यादव उस वक्त केंद्र की मनमोहन सरकार का हिस्सा थे। जिसके चलते केंद्र की मनमोहन सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक अध्यादेश लायी।
24 सितंबर 2013 को कांग्रेस सरकार ने प्रेस कांफ्रेंस कर अध्यादेश की खूबी बताने की कोशिश की। लेकिन उसी बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने आकर अध्यादेश की कॉपी फाड़ दी। राहुल ने कहा कि "यह अध्यादेश बकवास है और इसे फाड़ कर फेंक देना चाहिए।" जिसके कारण यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव में नहीं लाया गया और आखिरकार केंद्र की मनमोहन सरकार को भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानना पड़ा।
राहुल को हुई 2 साल की सजा, 15000 के मुचलके पर मिली जमानत, क्या लोकसभा सदस्यता होगी निरस्त?
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