जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए के प्रावधानों को हटाए जाने के सात वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने इसे देश के लिए एक ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया और राष्ट्रीय एकता को नई मजबूती प्रदान की।
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने संसद में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निष्प्रभावी करने और अनुच्छेद 35ए को समाप्त करने का फैसला लिया था। इसी के साथ तत्कालीन राज्य का पुनर्गठन कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया। यह फैसला स्वतंत्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक निर्णयों में से एक माना जाता है और आज इसके सात वर्ष पूरे हो गए हैं।
'एक देश, एक विधान, एक संविधान' से मजबूत हुआ नया भारत
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "एक देश, एक विधान, एक संविधान।" उन्होंने जम्मू-कश्मीर को सच्चे अर्थों में भारत की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनुच्छेद 370 और 35ए के निरस्तीकरण को ऐतिहासिक कदम बताया।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि पिछले सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उनके अनुसार आधारभूत ढांचे, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और निवेश जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है, जो इस निर्णय के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।
भाजपा ने बताया ऐतिहासिक फैसला
भाजपा लंबे समय से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की पक्षधर रही है। पार्टी का कहना है कि इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई, केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचा और निवेश तथा रोजगार के नए अवसर बने।
पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि इस निर्णय से देश की एकता और अखंडता को मजबूती मिली तथा जम्मू-कश्मीर को देश के अन्य राज्यों के समान संवैधानिक व्यवस्था के दायरे में लाया गया।
अनुच्छेद 370 और 35ए क्या थे?
अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के तहत विशेष प्रावधान प्रदान करता था, जिसके कारण राज्य को कुछ मामलों में अलग अधिकार प्राप्त थे। वहीं अनुच्छेद 35ए के तहत राज्य सरकार को स्थायी निवासियों की परिभाषा तय करने और उन्हें विशेष अधिकार देने का अधिकार मिला हुआ था। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने इन प्रावधानों को समाप्त करते हुए नई संवैधानिक व्यवस्था लागू की।