अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के लिए सोमवार का दिन एक बड़ा कानूनी झटका लेकर आया। सुप्रीम कोर्ट ने उनके और उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की प्रारंभिक सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दे दिए हैं। मामला पिछले एक दशक में नियमों को ताक पर रखकर 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके आवंटित करने से जुड़ा है।
क्या हैं आरोप?
याचिकाकर्ता एनजीओ 'सेव मोन रीजन फेडरेशन' और 'वॉलंटरी अरुणाचल सेना' की ओर से वरिष्ठ वकील **प्रशांत भूषण** ने कोर्ट में दलीलें पेश कीं:
परिवार को फायदा:आरोप है कि पिछले 10 वर्षों में मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों से जुड़ी चार फर्मों को 1,270 करोड़ रुपये के सार्वजनिक निर्माण कार्य (Public Works) आवंटित किए गए।
ठेकों का गणित: कुल रकम में से 1,245 करोड़ रुपये टेंडर के जरिए और 25 करोड़ रुपये सीधे वर्क ऑर्डर के रूप में दिए गए।
पक्षपात का दावा:भूषण ने कोर्ट से कहा, "यह मामला पूरी तरह भ्रष्टाचार की बू दे रहा है। राज्य पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएगी, इसलिए सीबीआई जांच अनिवार्य है।"
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
दिसंबर में हुई पिछली सुनवाई के दौरान, अदालत ने इन ठेकों के आवंटन को एक "अजीब संयोग" (Remarkable Coincidence) बताया था।
कोर्ट ने गौर किया था कि अलग-अलग बोलियों (Bids) के बीच अंतर इतना कम था कि इससे 'कार्टेलाइजेशन' (कंपनियों की आपसी मिलीभगत) का संदेह पैदा होता है।
सरकार और CM का पक्ष
पेमा खांडू: मुख्यमंत्री ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए किसी भी गलत काम से इनकार किया है।
राज्य सरकार: अरुणाचल प्रदेश सरकार के वकील ने इस याचिका को "प्रायोजित मुकदमेबाजी" (Sponsored Litigation) करार दिया और दावा किया कि ठेके देने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी।
अगला कदम: 16 हफ्ते में रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने और अगले 16 हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
यह केवल एक राज्य का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन और पारदर्शिता का सवाल है।" — कानूनी विशेषज्ञों की राय
इस आदेश के बाद अरुणाचल प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। विपक्षी दल अब मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर सकते हैं।