नई दिल्ली. भारत की 3 दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने मुंबई में आयोजित भारत-बेल्जियम उच्चस्तरीय संवाद में वैश्विक व्यापार व्यवस्था और भारत-यूरोप आर्थिक संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बदलते अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए खुले और नियम आधारित व्यापार की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे। चर्चा में बंदरगाहों, रसद व्यवस्था, समुद्री संपर्क और व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने के मुद्दे प्रमुख रहे। बेल्जियम के प्रधानमंत्री की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था संरक्षणवाद, आयात शुल्क और बदलती व्यापार नीतियों के कारण लगातार दबाव में है।
बिना नाम लिए अमेरिकी शुल्क नीति पर तीखा तंज
बार्ट डी वेवर ने अपने संबोधन के दौरान किसी देश या नेता का सीधे नाम लिए बिना उन नीतियों पर निशाना साधा जिनमें व्यापारिक शुल्कों को बार-बार बदला जाता है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कुछ देश सोमवार को कोई निर्णय लेते हैं, बुधवार को उसे वापस ले लेते हैं और शनिवार को फिर उसी निर्णय को लागू कर देते हैं। उनका यह बयान स्पष्ट रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बदलती शुल्क नीतियों के संदर्भ में देखा गया। डी वेवर ने बढ़ते संरक्षणवाद को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया और कहा कि बाजारों को बंद करने तथा व्यापारिक बाधाएं बढ़ाने की प्रवृत्ति लंबे समय में किसी के हित में नहीं है। उनके बयान ने यह संकेत दिया कि यूरोप के भीतर भी व्यापारिक स्थिरता और नीतिगत भरोसे को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता की खुलकर प्रशंसा
बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यापार संबंधी सोच की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने संकेत दिया कि भारत ने जिस तरह खुले और नियम आधारित व्यापार की जरूरत पर पहले से जोर दिया, दुनिया अब उसकी अहमियत को अधिक स्पष्ट रूप से महसूस कर रही है। डी वेवर की टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और प्रमुख आर्थिक शक्तियों के बीच व्यापारिक तनाव ने कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ाई है। उन्होंने भारत के साथ यूरोप के व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि स्थिर और पूर्वानुमान योग्य व्यापार व्यवस्था निवेश तथा आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। उनके शब्दों में भारत की आर्थिक क्षमता और उसकी व्यापारिक नीति के प्रति यूरोपीय विश्वास की झलक भी दिखाई दी।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते को बताया अहम उपलब्धि
डी वेवर ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की सराहना करते हुए इसे वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक समझौतों में से एक बताया। भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों के विस्तार से दोनों पक्षों के उद्योगों, निवेशकों और निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है। यूरोपीय बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ भारत में यूरोपीय निवेश और तकनीकी सहयोग को भी इससे गति मिल सकती है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने इस समझौते को केवल व्यापार बढ़ाने का माध्यम नहीं बल्कि भरोसेमंद आर्थिक संबंधों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा। ऐसे समय में जब कई देश अपने बाजारों को संरक्षण देने के लिए शुल्क और व्यापारिक प्रतिबंधों का सहारा ले रहे हैं, भारत-यूरोप समझौते को खुले व्यापार के पक्ष में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
केवल मनमाना शुल्क ही नहीं, बाजार बिगाड़ने वाली नीतियां भी चुनौती
बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौती को केवल अचानक लगाए जाने वाले शुल्कों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि कुछ देश इससे अलग तरीके अपनाते हैं और सुनियोजित तथा संरचनात्मक तरीके से बाजार को विकृत करते हैं। उनका संकेत ऐसी आर्थिक नीतियों की ओर था जिनमें सरकारी सहायता, असमान प्रतिस्पर्धा, उत्पादन प्रोत्साहन या अन्य उपायों के जरिए घरेलू उद्योगों को अनुचित लाभ मिल सकता है। डी वेवर के मुताबिक ऐसी परिस्थितियों में केवल शुल्क कम करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यापार व्यवस्था की जरूरत है जिसमें सभी देशों के लिए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता सुनिश्चित हो। उनका यह दृष्टिकोण यूरोप की उस व्यापक चिंता से जुड़ा है जिसमें वैश्विक बाजार में समान अवसर और नियमों के पालन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बंदरगाह और समुद्री संपर्क पर भारत-बेल्जियम की नजर
मुंबई में आयोजित संवाद के दौरान व्यापारिक सहयोग के साथ बंदरगाह, रसद और समुद्री संपर्क भी चर्चा के प्रमुख विषय रहे। बेल्जियम के लिए यह क्षेत्र विशेष महत्व रखता है क्योंकि वह यूरोप के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार केंद्रों में शामिल है, जबकि भारत अपने समुद्री बुनियादी ढांचे और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है। दोनों देशों के बीच बंदरगाह प्रबंधन, माल ढुलाई, समुद्री संपर्क और आपूर्ति शृंखला से जुड़े सहयोग को विस्तार देने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। वैश्विक व्यापार में किसी वस्तु की प्रतिस्पर्धात्मकता केवल उत्पादन लागत से तय नहीं होती, बल्कि उसे बाजार तक पहुंचाने में लगने वाला समय और खर्च भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में भारत और बेल्जियम के बीच समुद्री तथा रसद सहयोग व्यापारिक संबंधों को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए भरोसा सबसे बड़ी जरूरत
बार्ट डी वेवर की टिप्पणियों का व्यापक संदेश यही रहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए स्थिरता, पारदर्शिता और भरोसा जरूरी है। यदि बड़े देश अचानक शुल्क बढ़ाते या घटाते हैं और व्यापारिक नियमों में लगातार बदलाव करते हैं तो कंपनियों के लिए निवेश, उत्पादन और आपूर्ति शृंखला से जुड़े निर्णय लेना कठिन हो जाता है। इसका असर अंततः उपभोक्ताओं, निर्यातकों और रोजगार पर भी पड़ सकता है। ऐसे वातावरण में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक स्तर पर अपेक्षाकृत स्थिर आर्थिक साझेदारी का संकेत देता है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री का प्रधानमंत्री मोदी की व्यापारिक सोच की प्रशंसा करना इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दर्शाता है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत को एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।