कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब विधानसभा में नई सरकार का पहला सत्र 15 मई, शुक्रवार को आयोजित होने जा रहा है। भाजपा सरकार के गठन के बाद यह पहला विधायी सत्र होगा, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हैं। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना में सभी विधायकों को सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
15 साल बाद बदला सत्ता का समीकरण
राज्य में लगातार 15 वर्षों तक सत्ता में रहने वाली टीएमसी सरकार के अंत के बाद भाजपा ने इस बार 207 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई है। ऐसे में यह विधानसभा सत्र राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नई सरकार अपने शुरुआती एजेंडे और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का संकेत इसी सत्र से दे सकती है।
राज्यपाल के आदेश पर बुलाया गया सत्र
विधानसभा सचिवालय की अधिसूचना के मुताबिक राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह सत्र बुलाया है। अधिसूचना विधानसभा के प्रधान सचिव सौमेंद्र नाथ दास की ओर से जारी की गई।
सूत्रों के अनुसार, इस सत्र में कई प्रशासनिक और विधायी मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। नई सरकार कानून-व्यवस्था, विकास और प्रशासनिक सुधारों को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को सदन में रख सकती है।
शपथ ग्रहण के बाद शुरू होगी सदन की कार्यवाही
इससे पहले बुधवार से नवनिर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई। 294 सदस्यीय विधानसभा में पहले दिन 144 विधायकों ने शपथ ली, जबकि बाकी सदस्यों को गुरुवार को शपथ दिलाई जाएगी। दो दिनों तक चलने वाली इस प्रक्रिया के बाद शुक्रवार को विधानसभा का पहला पूर्ण सत्र आयोजित होगा।
भाजपा के लिए शक्ति प्रदर्शन का मौका
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के लिए यह सत्र सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन का भी बड़ा अवसर होगा। भारी बहुमत के साथ सदन में पहुंची भाजपा सरकार विपक्ष के सामने अपने मजबूत जनादेश का संदेश देने की तैयारी में है।