रायपुर। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और बढ़ती चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील का असर अब राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल की बचत, संसाधनों के संयमित उपयोग और आर्थिक अनुशासन को लेकर पीएम मोदी द्वारा दिए गए संदेश के बाद छत्तीसगढ़ में सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने अपने सरकारी काफिलों और खर्चों में कटौती शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री ने घटाया अपना कारकेड
विष्णु देव साय ने ईंधन संरक्षण और सादगी का संदेश देते हुए अपने कारकेड में कटौती का फैसला लिया है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री के काफिले में पहले 13 गाड़ियां शामिल रहती थीं, जिसे घटाकर अब 8 कर दिया गया है।
सरकार अब धीरे-धीरे सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV में बदलने की तैयारी भी कर रही है। इसे ऊर्जा बचत और भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
मंत्री-विधायक भी दिखे सादगी के अंदाज में
प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में भी इस बदलाव की झलक देखने को मिली। कई मंत्री और विधायक बिना बड़े काफिले के कार्यक्रम स्थल पहुंचे। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के साथ पदाधिकारी एक ही वाहन में बैठकर पहुंचे।
यहां तक कि पार्टी के कुछ प्रवक्ता भी ई-रिक्शा जैसे सार्वजनिक साधनों का इस्तेमाल करते नजर आए। भाजपा इसे “सकारात्मक और जिम्मेदार राजनीति” का संदेश बता रही है।
बीजेपी बोली - सकारात्मक बदलाव की शुरुआत
डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का असर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली में दिख रहा है और इससे जनता के बीच भी ईंधन संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।
वहीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इसे भविष्य के लिए जरूरी कदम बताया।
कांग्रेस का पलटवार, भ्रष्टाचार पर घेरा
दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर सियासी हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सिर्फ काफिले कम करने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम नहीं होंगी।
कांग्रेस का आरोप है कि यदि वास्तव में आर्थिक सुधार करना है तो सरकार को पहले भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और फिजूलखर्ची पर रोक लगानी चाहिए। विपक्ष का कहना है कि यह कदम केवल “राजनीतिक संदेश” भर है, जिससे आम लोगों को सीधी राहत नहीं मिलने वाली।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई बहस
पीएम मोदी की अपील के बाद छत्तीसगढ़ में अब नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। भाजपा इसे आर्थिक अनुशासन और जिम्मेदार प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे दिखावटी राजनीति करार दे रही है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी काफिलों में कटौती और ईंधन बचत जैसे कदम आम नागरिक को महंगाई और आर्थिक दबाव से राहत दिला पाएंगे, या फिर यह केवल एक अल्पकालिक राजनीतिक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।