नई दिल्ली. ब्रिक्स सम्मेलन से सामने आई प्रतिनिधियों की फैमिली फोटो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास ध्यान खींचा है। तस्वीर में सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि मौजूद हैं, लेकिन नेताओं की स्थिति ने इसे खास बना दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तस्वीर के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं, जबकि उनके एक ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दूसरी ओर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग खड़े नजर आए। इस दृश्य को भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका और वैश्विक शक्ति-संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत, रूस और चीन की एक साथ मौजूदगी का संदेश
फोटो में प्रधानमंत्री मोदी के दोनों ओर पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी ने एक व्यापक कूटनीतिक संदेश की ओर ध्यान खींचा है। भारत, रूस और चीन तीनों ही वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में प्रभावशाली शक्तियां हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई स्तरों पर तनाव और प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है, तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी यह संकेत देती है कि ब्रिक्स वैश्विक व्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
साझा दृष्टिकोण को सहयोग में बदलने पर मोदी का जोर
फोटोशूट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों को ‘सतर्कता, नवाचार, सहयोग और स्थिरता’ जैसे 4 स्तंभों पर आगे बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी देशों के सहयोग और समर्थन से साझा दृष्टिकोण को अलग-अलग क्षेत्रों में ठोस सहयोग में बदलने में सफलता मिली है। उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव का आम लोगों के जीवन पर व्यापक और नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
महामारी और जलवायु संकट से मिली बड़ी सीख
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और आपूर्ति शृंखला में आई रुकावटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आपस में जुड़ी हुई दुनिया में कोई भी संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। किसी एक हिस्से में पैदा हुई समस्या का असर दूसरे क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है। इसी कारण ब्रिक्स में संकटों के प्रति लचीलापन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि सदस्य देश संभावित चुनौतियों के लिए पहले से तैयार रह सकें और जरूरत पड़ने पर तेजी से सामूहिक कार्रवाई कर सकें।
समय रहते संकट की पहचान और कार्रवाई जरूरी
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी चुनौती से निपटने के लिए उसे समय रहते पहचानना, उसके लिए तैयारी करना और तत्काल कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। इसी दृष्टिकोण के तहत संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम पर सहमति बनी है। इसका उद्देश्य संभावित स्वास्थ्य संकटों की समय रहते पहचान और बेहतर समन्वय को बढ़ावा देना है।
आपदा प्रबंधन और आपूर्ति शृंखला पर भी फोकस
ब्रिक्स देशों के बीच आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए अर्ली वॉर्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइन तैयार की गई है। इसके जरिए अलग-अलग देशों के बीच चेतावनी और आपदा संबंधी आंकड़ों के बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन के लिए ऑपरेशन फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला को अधिक भरोसेमंद और संकटों के प्रति सक्षम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बदलती वैश्विक व्यवस्था में ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका
ब्रिक्स की फैमिली फोटो महज एक औपचारिक तस्वीर नहीं रही, बल्कि इसके जरिए संगठन की बदलती भूमिका पर भी चर्चा शुरू हो गई है। तस्वीर के केंद्र में भारत और उसके दोनों ओर रूस तथा चीन के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने यह दिखाया कि ब्रिक्स अब वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। भारत की सक्रिय भागीदारी और प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका इस बदलते शक्ति-संतुलन में नई दिल्ली की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को भी रेखांकित करती है।