तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने राज्यसभा की एकमात्र रिक्त सीट अपने सहयोगी दल कांग्रेस को देने का फैसला किया है। इस कदम को कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है, जबकि विपक्षी डीएमके ने इस पर तंज कसते हुए इसे भाजपा के खिलाफ लड़ाई की "आउटसोर्सिंग" करार दिया है।
कांग्रेस को मिला बड़ा राजनीतिक तोहफा
तमिलनाडु में अल्पमत की सरकार चला रही टीवीके के लिए कांग्रेस का समर्थन बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री विजय द्वारा अपने हिस्से की राज्यसभा सीट कांग्रेस को सौंपने के फैसले को गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। यह फैसला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर की मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात के बाद सामने आया।
प्रवीण चक्रवर्ती बन सकते हैं उम्मीदवार
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस रणनीतिकार प्रवीण चक्रवर्ती को इस सीट के लिए उम्मीदवार बनाया जा सकता है। माना जाता है कि कांग्रेस-टीवीके गठबंधन को आकार देने में उनकी अहम भूमिका रही है, जिसने राज्य की राजनीति में नया समीकरण तैयार किया। यह सीट एआईएडीएमके नेता सी.वी. षणमुगम के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।
कांग्रेस बोली- संसद में मजबूत होगी आवाज
कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री विजय के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी सांसद जोथिमणि ने कहा कि राज्यसभा में एक अतिरिक्त सदस्य मिलने से संसद में कांग्रेस की आवाज और मजबूत होगी तथा भाजपा का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में मदद मिलेगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह कदम 2029 लोकसभा चुनाव और दक्षिण भारत में भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
DMK ने साधा निशाना
डीएमके प्रवक्ता ए. सरवनन ने इस फैसले पर कटाक्ष करते हुए कहा कि टीवीके संसद में भाजपा के साथ सीधे टकराव से बचना चाहती है, इसलिए उसने यह जिम्मेदारी कांग्रेस को सौंप दी है। उन्होंने इसे राजनीतिक लड़ाई की "आउटसोर्सिंग" बताया। हालांकि, टीवीके ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह फैसला गठबंधन को और मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह किसी लड़ाई से बचने का नहीं, बल्कि सहयोग बढ़ाने का कदम है।
गठबंधन की मजबूती पर फोकस
टीवीके नेताओं का कहना है कि राज्यसभा में एक सीट से ज्यादा महत्वपूर्ण सहयोगी दलों के साथ मजबूत राजनीतिक तालमेल है। पार्टी का मानना है कि कांग्रेस के साथ यह साझेदारी आने वाले वर्षों में दक्षिण भारतीय राजनीति में अहम भूमिका निभाएगी।