नई दिल्ली. केंद्र सरकार बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय दवा नियामक ने कफ सिरप की लेबलिंग नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत जल्द ही कफ सिरप की हर बोतल पर लाल रंग में यह स्पष्ट चेतावनी लिखी जाएगी कि यह दवा 4 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जानी चाहिए। यह बदलाव माता-पिता और अभिभावकों को आसानी से सतर्क करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। प्रस्ताव को अंतिम रूप दिए जाने के बाद सभी निर्माताओं को इसका पालन करना होगा।
चेतावनी कैसे लिखी जाएगी
दवा नियामक के प्रस्ताव के मुताबिक कफ सिरप की हर बोतल पर 65 प्रतिशत हिस्से में लाल रंग से यह चेतावनी साफ-साफ शब्दों में लिखी जाएगी। चेतावनी में स्पष्ट रूप से उल्लेख होगा कि इस दवा का इस्तेमाल 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए न किया जाए। इसके अलावा सिरप के लेबल पर स्कूल जाने की उम्र के बच्चों की एक तस्वीर भी लगाई जाने का प्रस्ताव है। इससे माता-पिता आसानी से समझ सकेंगे कि दवा किस आयु वर्ग के लिए सुरक्षित है। लाल रंग का चयन इसलिए किया गया है ताकि चेतावनी दूर से ही नजर आ जाए और अनदेखी न हो।
नियमों में संशोधन की जरूरत
इस बदलाव को लागू करने के लिए सरकार को ड्रग्स रूल्स 1945 के नियम 96 में संशोधन करना होगा। फिलहाल इस प्रस्ताव को ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी के सामने विचार के लिए रखा गया है। कमेटी की मंजूरी के बाद ही नियम में औपचारिक बदलाव किया जाएगा। संशोधन के बाद सभी कफ सिरप निर्माताओं को नई लेबलिंग का पालन करना अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि बाजार में उपलब्ध हर बोतल पर एक समान और स्पष्ट चेतावनी हो। नियमों के सख्ती से लागू होने पर बच्चों को गलत दवा दिए जाने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम
छोटे बच्चों को सर्दी-खांसी की दवाएं दिए जाने और उसके बाद सामने आने वाली शिकायतों को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। अक्टूबर 2025 में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय यानी DGHS की तरफ से सख्त निर्देश जारी किए गए थे कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को सर्दी-खांसी की दवाएं न लिखी जाएं। इन निर्देशों के बावजूद कई मामलों में बच्चों को अनुपयुक्त दवाएं दिए जाने की शिकायतें सामने आईं। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अब लेबलिंग स्तर पर स्पष्ट चेतावनी अनिवार्य करने का प्रस्ताव लाया गया है ताकि कोई भ्रम न रहे।
पहले जारी निर्देश और आगे की राह
DGHS के निर्देशों के बाद भी जागरूकता की कमी और लेबल पर स्पष्ट जानकारी न होने से समस्या बनी रही। नए प्रस्ताव से यह खामी दूर होने की उम्मीद है। ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी के विचार और मंजूरी के बाद नियम में संशोधन जल्द लागू हो सकता है। इसके बाद बाजार में उपलब्ध कफ सिरप की सभी बोतलों पर लाल चेतावनी अनिवार्य हो जाएगी। माता-पिता और डॉक्टर दोनों के लिए यह स्पष्ट मार्गदर्शन साबित होगा। बच्चों की सेहत को लेकर सरकार की यह पहल सराहनीय मानी जा रही है और इससे अनावश्यक जोखिम कम होने की उम्मीद है।