संसद के विशेष सत्र के दौरान राज्यसभा में गुरुवार (21 सितंबर) को महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से पास हो गया। सभी दलों ने इस बिल का समर्थन किया। बिल के समर्थन में 214 वोट और विरोध में कोई वोट नहीं पड़ा। ये बिल बुधवार को लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद पारित हो गया था। राज्यसभा में इस बिल पर प्रस्तावित सारे संशोधन भी गिर गए। लोकसभा में इस बिल के पक्ष में 454 और विरोध में 2 वोट पड़े थे। इस विधेयक में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा से महिला आरक्षण बिल के पारित होने पर बसपा प्रमुख मायावती ने इसका स्वागत किया है।
महिला आरक्षण बिल पारित हो जाने का स्वागत
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने अपने एक्स सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट करते हुए जहां एक ओर महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया। वहीं दूसरी ओर वो इसे लेकर ऐतराज दिखाती दिखी। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट से पोस्ट करते हुए लिखा कि 'महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाने का स्वागत, किन्तु देश इसका भरपूर व जोरदार स्वागत करता अगर उनकी अपेक्षाओं के अनुसार, यह अविलम्ब लागू हो जाता। अब तक लगभग 27 सालों की लम्बी प्रतीक्षा के बाद अनिश्चितता का अब आगे और लम्बा इंतजार करना कितना न्यायसंगत?'
कड़ा रुख पेश किया
इसके साथ ही मायावती ने महिला आरक्षण बिल पर अपना कड़ा रुख भी पेश किया उन्होंने महिला आरक्षण बिल में बहुसंख्यक OBC समाज की महिला को आरक्षण में शामिल नहीं करने पर इसे उन पर अन्याय बताया है। उन्होंने अपने अगले एक्स सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा 'वैसे देश की आबादी के बहुसंख्यक OBC समाज की महिलाओं को आरक्षण में शामिल नहीं करना बहुजन समाज के उस बड़े वर्ग को न्याय से वंचित रखना है। इसी प्रकार SC व ST समाज की महिलाओं को अलग से आरक्षण नहीं देना भी उतना ही अनुचित व सामाजिक न्याय की मान्यता को नकारना है।'
जहां चाह है वहां राह
मायावती ने OBC समाज की महिला को महिला आरक्षण बिल में शामिल किए जाने को लेकर कोशिश जारी रखने की ओर इशारा करते नजर आई। उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा 'किन्तु जहां चाह है वहां राह है और इसीलिए सरकार ओबीसी समाज को इस महिला आरक्षण बिल में शामिल करे, एससी व एसटी वर्ग की महिलाओं को अलग से आरक्षण दे और इस विधेयक को तत्काल प्रभाव से लागू करने के सभी जरूरी उपाय करे।
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