नई दिल्ली: दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को जल्द महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों को फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद राजधानी में बिजली दरों में 1% से 3.30% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि सरकार की बिजली सब्सिडी योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिलेगी, लेकिन अधिक बिजली खपत करने वाले और गैर-सब्सिडी उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है।
500 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करने वालों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
DERC के फैसले के अनुसार 500 यूनिट से अधिक बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। बिजली वितरण कंपनियों को अप्रैल 2026 के लिए मासिक पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (PPAC) 16% से 18% तक लगाने की अनुमति दी गई है। इसके चलते गैर-सब्सिडी श्रेणी के घरेलू उपभोक्ताओं, बड़े आवासीय उपभोक्ताओं और उच्च खपत वाले परिवारों के मासिक बिल पहले की तुलना में अधिक आ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों के मौसम में एसी और अन्य उपकरणों के अधिक उपयोग के कारण कई उपभोक्ताओं पर इसका अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को भी लगेगा झटका
बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। दुकानों, कार्यालयों, छोटे उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अब बिजली पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिजली लागत बढ़ती है तो इसका असर कई सेवाओं और उत्पादों की कीमतों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे सकता है। ऐसे में व्यापारिक क्षेत्र के लिए यह फैसला अतिरिक्त खर्च बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
सब्सिडी लेने वाले उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत
दिल्ली सरकार की पूर्ण या 50 प्रतिशत बिजली सब्सिडी योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। 0 से 200 यूनिट और 200 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं के बिल पर इस बढ़ोतरी का कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। DERC ने स्पष्ट किया है कि सब्सिडी प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी, जिससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं आएगा।
वैश्विक ऊर्जा संकट और महंगे कोयले का असर
बिजली दरों में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण बिजली उत्पादन और खरीद की बढ़ती लागत को माना जा रहा है। वैश्विक ऊर्जा संकट, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमतों में उछाल और बिजली खरीद पर बढ़ते खर्च ने वितरण कंपनियों की लागत बढ़ा दी है। इसी को देखते हुए DERC ने कंपनियों को अतिरिक्त ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार (FPPAS) वसूलने की अनुमति दी है। अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुंचाना जरूरी हो गया था।
10% सरचार्ज कैप हटने से बढ़ सकती है चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक बिजली कंपनियों पर लागू 10 प्रतिशत सरचार्ज सीमा (कैप) को भी हटा दिया गया है। इससे भविष्य में बिजली खरीद लागत बढ़ने की स्थिति में गैर-सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं पर और अधिक वित्तीय असर पड़ सकता है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह फैसला बिजली कंपनियों को राहत देगा, लेकिन उच्च खपत वाले उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल और महंगे होने की आशंका बढ़ा सकता है।
क्या होगा आम उपभोक्ता पर असर?
विशेषज्ञों के अनुसार जिन उपभोक्ताओं की मासिक बिजली खपत 500 यूनिट से कम है और जो सब्सिडी योजना के पात्र हैं, उन्हें फिलहाल चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन बड़े परिवार, उच्च बिजली खपत वाले घर, कारोबारी प्रतिष्ठान और उद्योग अब अपने बिजली खर्च में बढ़ोतरी महसूस कर सकते हैं। आने वाले महीनों में गर्मी के दौरान बढ़ी खपत के साथ बिजली बिल का बोझ और अधिक महसूस हो सकता है।