भोपाल: धार स्थित भोजशाला को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। संगठन ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कराने की मांग की है।
हाईकोर्ट के आदेशों के पालन पर उठाए सवाल
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को दिए अपने आदेश में भोजशाला को देवी वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर मानते हुए वहां संस्कृत भाषा, साहित्य और व्याकरण के अध्ययन-अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही थी।
संगठन का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद उसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अब तक कोई स्पष्ट व्यवस्था सामने नहीं आई है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
ध्वज और प्रतिमा प्रकरण पर भी सवाल
पत्र में भोजशाला परिसर में लगाए गए ध्वज और देवी वाग्देवी की प्रतिमा को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने पूछा है कि यदि 17 मई को परिसर में ध्वज लगाना नियमों के विरुद्ध था, तो उसे लगाने की अनुमति क्यों दी गई। वहीं यदि यह वैध था, तो बाद में उसे हटाया क्यों गया। इसी प्रकार 6 जून को वाग्देवी की प्रतिमा को कुछ समय के लिए गर्भगृह में स्थापित किए जाने का उल्लेख करते हुए संगठन ने सवाल उठाया कि यदि यह कार्रवाई गलत थी तो प्रतिमा स्थापित कैसे हुई और यदि सही थी तो बाद में उसे हटाने का निर्णय क्यों लिया गया।
संस्कृत कार्यक्रमों में बाधा डालने का आरोप
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने आरोप लगाया है कि भोजशाला परिसर में संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों के आयोजन में भी बाधाएं उत्पन्न की गईं।
संगठन का कहना है कि इससे यह संदेश जाता है कि न्यायालय के आदेशों के अनुरूप होने वाली गतिविधियों को लागू करने में अनावश्यक अड़चनें पैदा की जा रही हैं। उनका दावा है कि इससे श्रद्धालुओं और समाज में असमंजस की स्थिति बन रही है।
ASI अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
पत्र में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन का आरोप है कि ASI के महानिदेशक स्तर पर दिए गए निर्देशों का पालन भोपाल और धार स्तर के अधिकारियों द्वारा प्रभावी ढंग से नहीं किया जा रहा।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का कहना है कि स्थानीय अधिकारी हर निर्णय के लिए दिल्ली से निर्देशों की प्रतीक्षा करते हैं, जिसके कारण आदेशों के क्रियान्वयन में लगातार देरी हो रही है।
मुख्यमंत्री से लिखित SOP जारी कराने की मांग
संगठन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर ASI को स्पष्ट और लिखित दिशा-निर्देश जारी कराने की पहल करें। पत्र में कहा गया है कि मौखिक निर्देशों के बजाय स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की जानी चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे और न्यायालय के आदेशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके।
आंदोलन की चेतावनी
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने चेतावनी दी है कि यदि भोजशाला मामले में जल्द स्पष्टता नहीं लाई गई और न्यायालय के आदेशों का पूर्ण पालन नहीं हुआ, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।
संगठन का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर भोजशाला मुद्दे को लेकर प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अभियान और आंदोलन चलाया जाएगा।
लंबे समय से विवादों के केंद्र में है भोजशाला
गौरतलब है कि धार की भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवादों का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसी विवाद को लेकर समय-समय पर न्यायालयों और प्रशासन के समक्ष विभिन्न याचिकाएं और मांगें उठती रही हैं। हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।