नई दिल्ली. धनतेरस को भारतीय परंपरा में सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान धातुओं की खरीदारी के लिए विशेष शुभ अवसर माना जाता है। इस दिन आभूषणों और कीमती धातुओं की मांग सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है। हालांकि, इस बार त्योहार के मौके पर वायदा बाजार में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 4 दिसंबर की डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,44,095 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शुक्रवार को इसका कारोबार 1,42,161 रुपये पर शुरू हुआ और शुरुआती कारोबार में कीमत घटकर 1,42,101 रुपये तक पहुंच गई। सुबह 9:32 बजे सोना 1,851 रुपये यानी 1.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,046 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। त्योहार के दिन आई इस गिरावट ने उन खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया है, जो सोने की कीमतों में नरमी का इंतजार कर रहे थे।
चांदी की कीमत में भी 3,400 रुपये से अधिक की गिरावट
सोने के साथ-साथ चांदी के वायदा कारोबार में भी शुरुआती सत्र के दौरान दबाव देखने को मिला। एमसीएक्स पर चांदी की कीमत में एक समय लगभग 3,440 रुपये की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव घटकर 1,83,700 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। चांदी की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की गतिविधियों से भी प्रभावित होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी का इस्तेमाल बढ़ने के कारण इसकी मांग का स्वरूप सोने से कुछ अलग है। इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों की संभावनाओं और निवेशकों की धारणा का असर दोनों धातुओं पर एक साथ पड़ सकता है। धनतेरस के अवसर पर वायदा बाजार में आई इस गिरावट के बावजूद वास्तविक खरीदारी करने वाले ग्राहकों को खुदरा बाजार के भाव पर विशेष ध्यान देना होगा।
खुदरा बाजार में सोने-चांदी के भाव क्यों नहीं घटे?
वायदा बाजार में बड़ी गिरावट के बावजूद भौतिक बाजार में सोने और चांदी की कीमतें लगभग स्थिर दिखाई दे रही हैं। उपलब्ध खुदरा दरों के अनुसार, 24 कैरेट सोना 1,46,020 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। वहीं, 22 कैरेट सोने का भाव 1,33,850 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 1,09,520 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। चांदी की कीमत 2,10,000 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है। वायदा और खुदरा बाजार के भावों में अंतर कई कारणों से होता है। इनमें स्थानीय मांग, आयात लागत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, कर, परिवहन खर्च तथा आभूषण निर्माण शुल्क शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, खुदरा विक्रेता तत्काल बाजार की परिस्थितियों और अपने उपलब्ध भंडार के अनुसार भी कीमतें निर्धारित करते हैं। इसलिए एमसीएक्स पर आई गिरावट का असर सर्राफा बाजार में उसी समय और उसी अनुपात में दिखाई देना जरूरी नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी को मिल रहा समर्थन
घरेलू बाजार में गिरावट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार से कीमती धातुओं के लिए सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में सोने की कीमत 0.4 प्रतिशत बढ़कर 4,103.55 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। इस सप्ताह सोने में लगभग 5.9 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिसे अगस्त के बाद सबसे मजबूत साप्ताहिक बढ़त की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चांदी की कीमत भी 0.5 प्रतिशत बढ़कर 52.01 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम और मध्यावधि चुनावों के नतीजों के बाद निवेशकों की बदलती धारणा को भी बाजार की गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, किसी एक राजनीतिक घटनाक्रम को कीमतों में तेजी या गिरावट का एकमात्र कारण मानना उचित नहीं होगा। वैश्विक आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और सुरक्षित निवेश की मांग भी सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।
गोल्डमैन सैश ने घटाया सोने की कीमतों का अनुमान
सोने की भविष्य की कीमतों को लेकर वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैश ने अपने पूर्वानुमान में बदलाव किया है। बैंक ने पहले दिसंबर 2026 के अंत तक सोने की कीमत 4,650 डॉलर प्रति औंस पहुंचने का अनुमान जताया था, लेकिन अब इसे घटाकर 4,150 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। इस संशोधन के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और ब्याज दरों को लेकर बदलती परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखते हैं, तब सोने जैसे ऐसे निवेश विकल्पों पर दबाव पड़ सकता है, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। दूसरी ओर, वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक जोखिम बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर भी रुख करते हैं। यही वजह है कि सोने की कीमतों का भविष्य केवल मांग और आपूर्ति से तय नहीं होता, बल्कि मौद्रिक नीतियों और वैश्विक निवेश प्रवाह की दिशा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अमेरिकी ब्याज दरों का फैसला तय करेगा आगे की दिशा
सोने और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति का प्रभाव लगातार बना हुआ है। उपलब्ध सर्वेक्षण के मुताबिक, लगभग 71 प्रतिशत कारोबारियों का मानना है कि दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, यह कारोबारियों की धारणा है, न कि फेडरल रिजर्व की ओर से घोषित निर्णय। यदि अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं या लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड की आकर्षकता बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में सोने पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। इसके विपरीत, ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजबूत होने पर सोने में निवेश की मांग बढ़ सकती है। इसलिए आने वाले सप्ताहों में अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े, रोजगार संबंधी रिपोर्ट और केंद्रीय बैंक की नीतिगत टिप्पणियां कीमती धातुओं के कारोबार के लिए निर्णायक साबित हो सकती हैं।
धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
धनतेरस पर सोने-चांदी की खरीदारी करते समय केवल बाजार में आई गिरावट को आधार बनाना पर्याप्त नहीं है। ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि एमसीएक्स का भाव और आभूषण की दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत अलग-अलग हो सकती है। सोने के आभूषण खरीदते समय 22 या 18 कैरेट की शुद्धता, हॉलमार्क, निर्माण शुल्क और लागू कर की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। चांदी की खरीदारी में भी उसकी शुद्धता और वजन की पुष्टि करना जरूरी है। यदि उद्देश्य निवेश है, तो आभूषणों के बजाय सिक्के, छड़ या अन्य उपयुक्त निवेश माध्यमों की लागत और पुनर्विक्रय शर्तों की तुलना करना उपयोगी हो सकता है। बाजार में एक दिन की गिरावट को दीर्घकालिक सस्ता भाव मान लेना भी जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार कीमतों में तेजी से बदलाव संभव है। ऐसे में खरीदारी का निर्णय अपनी जरूरत, बजट और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर करना अधिक विवेकपूर्ण होगा।