नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर शुरू हुए राजनीतिक विवाद पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विपक्ष की ओर से की जा रही आलोचनाओं को लेकर यह स्पष्टीकरण दिया।
पीएम मोदी ने भाषण में क्या कहा?
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई और जवानों के बलिदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ देश ने बड़ी सफलता हासिल की है।
हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ की चुनौती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सली भले ही कमजोर पड़ गए हों, लेकिन माओवादी विचारधारा से प्रभावित कुछ लोग अब भी देश में हिंसा और गलत विचारों को बढ़ावा देने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने ऐसे तत्वों को पहचानने और अलग-थलग करने की बात कही।
बयान के बाद विपक्ष ने साधा निशाना
पीएम मोदी की टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर ‘दिमागी नक्सल’ होना ही आरोप है, तो उन्हें इस पहचान पर गर्व है। इसके बाद कांग्रेस समेत विपक्षी खेमे की ओर से प्रधानमंत्री के बयान को लेकर कई सवाल उठाए गए। विपक्ष का तर्क रहा कि इस तरह की भाषा राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं की जानी चाहिए।
किरेन रिजिजू ने विवाद पर किया स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ने के बाद किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के भाषण को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनके मुताबिक, पीएम मोदी ने विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। प्रधानमंत्री का संदर्भ उन लोगों से था, जो माओवादी विचारधारा या हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली सोच से जुड़े हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
प्रधानमंत्री के भाषण और उसके बाद आई विपक्षी प्रतिक्रियाओं ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। एक ओर सरकार नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता को बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष प्रधानमंत्री की भाषा और उनके बयान के राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठा रहा है। रिजिजू की सफाई के बाद अब यह विवाद प्रधानमंत्री के बयान के अर्थ और उसके राजनीतिक संदर्भ के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है।