नई दिल्ली: भारत की विदेश नीति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर आज से दो देशों—मॉरीशस और यूएई—के दौरे पर रवाना हो रहे हैं। यह दौरा भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) नीति और 'विजन महासागर' (Vision MAHASAGAR) के प्रति नई दिल्ली की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यात्रा का पहला चरण: मॉरीशस (9वां हिंद महासागर सम्मेलन)
दौरे के पहले पड़ाव में डॉ. जयशंकर मॉरीशस पहुंचेंगे। यहाँ उनके कार्यक्रमों का मुख्य केंद्र बिंदु निम्नलिखित है:
कीनोट एड्रेस: विदेश मंत्री 9वें हिंद महासागर सम्मेलन (IOC) में मुख्य भाषण देंगे, जहाँ वे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर भारत का दृष्टिकोण रखेंगे।
द्विपक्षीय वार्ता: वे मॉरीशस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की समीक्षा करेंगे।
वैश्विक दक्षिण (Global South): यह यात्रा 'ग्लोबल साउथ' के हितों की रक्षा करने और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका को मजबूत करने का एक बड़ा मंच है।
यात्रा का दूसरा चरण: संयुक्त अरब अमीरात (11-12 अप्रैल)
मॉरीशस के बाद, विदेश मंत्री 11 से 12 अप्रैल तक यूएई के दौरे पर रहेंगे।
रणनीतिक साझेदारी: यहाँ वे यूएई नेतृत्व के साथ **'व्यापक रणनीतिक साझेदारी'** (Comprehensive Strategic Partnership) को और अधिक गहरा करने पर चर्चा करेंगे।
सहयोग के क्षेत्र: ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
यात्रा के महत्वपूर्ण बिंदु (Key Takeaways):
विजन महासागर: हिंद महासागर क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (SAGAR) के लक्ष्य को बढ़ावा देना।
राजनयिक मेल-मिलाप:सम्मेलन के इतर डॉ. जयशंकर कई अन्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं।
आर्थिक जुड़ाव: यूएई के साथ आर्थिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश, जो भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है