इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने देश के युवाओं को सलाह दी है कि, सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचना है। चीन को पीछे छोड़ना है तो सप्ताह में कम से कम 70 घंटे काम करना चाहिए। वर्क प्रोडक्टिविटी बढ़ानी होगी। इसके अलावा उन्होंने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा कि, मुझे मेरे माता-पिता ने एक मंत्र दिया था और मैंने खुद अपने वर्किंग डेज में सप्ताह में 85 से 90 घंटे काम किया, जिसका नतीजा आज मैं हूं और यह कोई बर्बादी नहीं है।
चीन आज नंबर एक देश है, क्योंकि वहां मेहनत की जाती है
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति कहते हैं कि, आज जो भी देश समृद्ध हुआ है, उसने कड़ी मेहनत से यह मुकाम पाया है। चीन आज नंबर एक देश है, क्योंकि वहां मेहनत की जाती है। कड़ी मेहनत और घंटों काम किया जाता है। उन्होंने पना अनुभव को साझा करते हुए कहा कि, मैंने खुद अपनी कंपनी की स्थापना करते समय घंटों काम किया था। 1994 तक सप्ताह में 85 से 90 घंटे से अधिक काम करता था।
मैंने सप्ताह में 70 घंटे से अधिक घंटे काम किया
मूर्ति अपने बयान में आगे कहते हैं कि, मैंने 40 साल करियर को दिए। सप्ताह में 70 घंटे से अधिक घंटे काम किया। यह कोई बर्बादी नहीं है। अगर भारत चीन और जापान जैसे सबसे तेजी से बढ़ते देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करना चाहता है तो उसे कार्य उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, जर्मनी और जापान के लोगों ने अपने देश की खातिर अतिरिक्त घंटों तक काम किया। भारत के नौजवान देश के मालिक हैं और हमारी अर्थव्यवस्था के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन अभी इसमें कसर है।
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