संसद के मॉनसून सत्र के दौरान गुरुवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने एक अनोखे तरीके से प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगें रखीं। 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस' ('इंडिया') के कई सदस्यों ने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करने की मांग को लेकर संसद के बाहर प्याज की माला पहनकर प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया और कहा कि वर्तमान MSP नीति किसानों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है। प्याज की माला पहनकर अपना विरोध दर्ज करते हुए उन्होंने सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने कहा कि जब तक किसानों को उनकी फसल के लिए उचित मूल्य नहीं मिलता, तब तक उनके संघर्ष जारी रहेंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह कृषि संकट को प्राथमिकता दें और किसानों के हित में ठोस कदम उठाएं। इस विरोध प्रदर्शन ने संसद परिसर में सबका ध्यान खींचा, जहां विपक्षी दलों के नेता एकजुट होकर किसानों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे।
विपक्ष ने उठाई MSP की मांग
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने 'किसान को एमएसपी दो' और 'किसानों से अन्याय बंद करो' जैसे नारे लगाए, जो किसानों की समस्याओं और सरकार से उनकी मांगों को लेकर असंतोष को स्पष्ट रूप से दर्शाते थे। तृणमूल कांग्रेस के सांसद प्रसून बनर्जी, झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी और अन्य नेताओं ने प्याज की माला पहनकर अपना विरोध जताया। विपक्षी दलों का कहना है कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलना चाहिए, और इसके लिए MSP की कानूनी गारंटी आवश्यक है। उनका आरोप है कि मौजूदा नीतियां किसानों के हितों की सुरक्षा करने में नाकाम रही हैं, और इसी कारण उन्होंने यह प्रदर्शन किया। सरकार पर दबाव बनाने के लिए विपक्षी दल संसद के अंदर और बाहर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, और किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।शिवसेना का रूख
शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि तेदेपा और जदयू जैसी पार्टियों को 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' (MSP) दिया जा रहा है, लेकिन देश के किसानों को अब तक MSP नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से किसानों के हक में MSP की गारंटी देने की मांग की है। प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा कि महाराष्ट्र में किसानों के लिए प्याज के निर्यात पर जो रोक लगाई गई है, उसे तुरंत खत्म किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस फैसले से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है और इसे जारी रखना उनके हित में नहीं है। सांसद चतुर्वेदी के इस बयान से एक बार फिर किसान मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है और सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह किसानों की मांगों पर ध्यान दे।Written by- Prabhat Pandey
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