नई दिल्ली. त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है लेकिन इस बार मिठाइयों की बढ़ती कीमतें लोगों का बजट बिगाड़ रही हैं। देशभर में लड्डू, बर्फी, रसगुल्ले, संदेश और छेना पोड़ा जैसी पारंपरिक मिठाइयों के दाम पिछले साल की तुलना में औसतन 10 से 15 फीसदी तक बढ़ गए हैं। मिठाई कारोबारियों के मुताबिक चीनी, दूध, खोया, मेवे और ईंधन की लागत बढ़ने से कीमतों में इजाफा करना मजबूरी बन गया है। त्योहारी मांग के बावजूद ग्राहकों की जेब पर असर पड़ रहा है। कई परिवार बजट को ध्यान में रखते हुए खरीदारी सीमित कर रहे हैं। बाजार में मिठाइयों की उपलब्धता तो है लेकिन दामों ने मिठास फीकी कर दी है।
कोलकाता से दक्षिण भारत तक असर
कोलकाता से लेकर ओडिशा और दक्षिण भारत तक मिठाई निर्माताओं को बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है। कुछ दुकानदार ग्राहकों को बनाए रखने के लिए फिलहाल कीमतें नहीं बढ़ा रहे हैं लेकिन इससे उनके मुनाफे पर असर पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि लंबे समय तक बढ़ी हुई लागत खुद वहन करना संभव नहीं होगा। क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग मिठाइयों के दाम प्रभावित हुए हैं। पूर्वी भारत में छेना आधारित मिठाइयां जबकि दक्षिण में काजू और मक्खन वाली मिठाइयां महंगी हुई हैं। पूरे देश में लागत वृद्धि का प्रभाव साफ दिख रहा है।
ओडिशा में पारंपरिक मिठाइयों के दाम
ओडिशा में रसगुल्ले, छेना पोड़ा और छेना गाजा सहित पारंपरिक मिठाइयों के दाम में 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक की वृद्धि हुई है। छेना, दूध, चीनी और व्यावसायिक एलपीजी की कीमतें बढ़ने से उत्पादन महंगा हो गया है। स्थानीय मिठाई निर्माता बढ़ती लागत को ग्राहकों पर डालने के लिए मजबूर हैं। त्योहारी सीजन में मांग रहने के बावजूद दामों में इजाफा ग्राहकों के लिए चुनौती बन गया है। छोटे दुकानदार मुनाफा कम करके भी कारोबार बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। ओडिशा की पारंपरिक मिठाइयों की पहचान को महंगाई ने प्रभावित किया है।
दक्षिण भारत और दिल्ली-एनसीआर की स्थिति
दक्षिण भारत में काजू, मक्खन, चावल और दाल जैसी सामग्रियों के दाम बढ़ने से मिठाइयों की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। दिल्ली-एनसीआर के कारोबारियों को भी कच्चे माल, परिवहन और कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में मिठाई दुकानों पर दामों में साफ वृद्धि दिख रही है। परिवहन लागत बढ़ने से दूरदराज से आने वाले कच्चे माल का असर और बढ़ा है। कर्मचारी वेतन में बढ़ोतरी ने भी कुल लागत में योगदान दिया है। कारोबारी संतुलन बनाने में जुटे हैं।
चीनी की कीमतों में तेज उछाल
चीनी की बढ़ती कीमतें मिठाई उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। महाराष्ट्र की चीनी मिलों में इसकी कीमत करीब 4300 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 5200-5300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने और शुरुआती भंडार कम रहने से कीमतों में तेजी आई है। हालांकि नई फसल की पेराई शुरू होने और बाजार में आपूर्ति बढ़ने से राहत मिलने की उम्मीद है। चीनी मिठाइयों का प्रमुख घटक होने के कारण इसकी महंगाई सीधे दामों पर असर डाल रही है। उद्योग जगत इस स्थिति पर नजर रखे हुए है।
दूध और अन्य सामग्रियों का प्रभाव
दूध की कीमतों में वृद्धि ने भी मिठाई निर्माताओं की लागत बढ़ाई है। पशु आहार महंगा होने, असमान मानसूनी बारिश और दूध उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। खोया और छेना जैसी दूध आधारित सामग्रियां महंगी हुई हैं। मेवे और ईंधन की लागत ने भी योगदान दिया है। कारोबारियों का कहना है कि त्योहारों में मांग मजबूत रहने के बावजूद ग्राहकों की खरीद क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्हें कीमतें बढ़ाने और मुनाफा घटाकर कारोबार चलाने के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। लंबे समय तक यह स्थिति जारी रही तो छोटे निर्माताओं पर दबाव बढ़ेगा।
ग्राहकों और कारोबारियों की दुविधा
त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग हमेशा ऊंची रहती है लेकिन इस बार बढ़े दामों ने ग्राहकों की खरीदारी को प्रभावित किया है। कई परिवार कम मात्रा में मिठाई खरीद रहे हैं या वैकल्पिक विकल्प तलाश रहे हैं। कारोबारी मुनाफा कम करके भी ग्राहक बनाए रखने की कोशिश में हैं। कुछ दुकानदारों ने कीमतें स्थिर रखी हैं लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना संभव नहीं। चीनी और दूध की कीमतों में स्थिरता आने से राहत मिलने की उम्मीद है। त्योहारों की मिठास को महंगाई ने थोड़ा फीका जरूर कर दिया है लेकिन बाजार में रौनक बनी हुई है।