नई दिल्ली - भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ से जुड़े फैसले के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की उम्मीद जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि रूस से तेल खरीद से जुड़े नए अमेरिकी टैरिफ से भारत को छूट मिलने के बाद दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना बढ़ सकती है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि रूस से तेल खरीद से संबंधित नए अमेरिकी टैरिफ से भारत को राहत मिली है और जल्द ही दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता होने की पूरी संभावना है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों तथा शुल्क संबंधी मुद्दों पर बातचीत जारी रहने की चर्चा है। हालांकि, प्रियंका चतुर्वेदी का बयान संभावित समझौते को लेकर उनका आकलन है। इसे किसी आधिकारिक व्यापार समझौते की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ का मामला
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से संबंधित कानून को लागू करने के लिए आदेश जारी किया था। इस कानून का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शन्स रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ बताया गया है। ट्रंप ने 18 सितंबर को इस कानून पर हस्ताक्षर किए थे।
बताए गए प्रावधानों के अनुसार, रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 30 दिनों के भीतर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान था। इसके लिए 18 अक्टूबर की समयसीमा का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, टैरिफ लागू करने और फिर उसी आदेश के जरिए उसे समाप्त करने से जुड़े घटनाक्रम की आधिकारिक शर्तों और दायरे की पुष्टि जरूरी है। यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि राहत किन देशों, उत्पादों और आयात श्रेणियों पर लागू होती है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर निगाहें
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने पर दोनों देशों के कारोबारियों को शुल्क, बाजार पहुंच और व्यापारिक नियमों को लेकर स्पष्टता मिल सकती है। ऊर्जा आयात और टैरिफ से जुड़े मुद्दे भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की चर्चा का हिस्सा रहे हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे से जुड़े घटनाक्रम के बीच इस मुद्दे को और महत्व मिल गया है। हालांकि, किसी संभावित समझौते की समयसीमा, शर्तों और अंतिम स्वरूप को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।
क्या जल्द हो सकता है समझौता?
प्रियंका चतुर्वेदी ने अमेरिकी फैसले को भारत के लिए राहत के रूप में देखते हुए व्यापार समझौते की संभावना जताई है। लेकिन केवल टैरिफ संबंधी किसी फैसले के आधार पर समझौते को तय मानना उचित नहीं होगा। इसके लिए दोनों देशों की ओर से बातचीत, सहमति और औपचारिक घोषणा जरूरी होगी।
फिलहाल, भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों सरकारों की ओर से सामने आने वाली जानकारी से स्पष्ट हो सकेगा कि टैरिफ के मुद्दे पर राहत का दायरा क्या है और व्यापार समझौते की दिशा में कितनी प्रगति हुई है।