कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले कोलकाता की राजनीति में उबाल आ गया है। सोमवार की देर रात कोलकाता के मेयर और 'कोलकाता पोर्ट' क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार फिरहाद हकीम के आवास पर केंद्रीय वाहिनी और पुलिस पर्यवेक्षकों के पहुंचने से इलाके में तनाव फैल गया। मेयर ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों के कमांडरों और पर्यवेक्षकों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें सीधे तौर पर 'धमकी' दी।
"कुछ हुआ तो समझ लेंगे" - मेयर को मिली चेतावनी?
फिरहाद हकीम ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उनके घर पहुंचे अधिकारियों ने उन्हें डराने की कोशिश की। मेयर के अनुसार, अधिकारियों ने कहा, "अगर इलाके में कोई भी अशांति हुई, तो हम तुम्हें समझ लेंगे।" फिरहाद ने इस पर पलटवार करते हुए कहा, "चेतला में आज तक कभी अशांति नहीं हुई है। चुनाव आयोग और सुरक्षा बल मुझे बेवजह धमका रहे हैं।"
नक्सल काल से की तुलना
मीडिया से बात करते हुए फिरहाद हकीम भावुक और आक्रोशित नजर आए। उन्होंने कहा, "मैंने ऐसा माहौल केवल नक्सल आंदोलन के समय देखा था जब पुलिस और प्रशासन इस तरह से लोगों के घरों में घुसते थे। आज लोकतांत्रिक चुनाव के दौरान एक उम्मीदवार के साथ ऐसा व्यवहार करना शर्मनाक है।"
टीएमसी का विरोध
इस घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय बल और पर्यवेक्षक सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवारों को मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि कोलकाता पोर्ट एक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है और प्रशासन वहां शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। इस मामले में चुनाव आयोग या पुलिस पर्यवेक्षकों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। चेतला इलाके में मेयर के घर के बाहर भारी संख्या में टीएमसी समर्थक जमा हो गए हैं।