कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और पुलिस प्रशासन में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास को गिरफ्तार कर लिया। पांच बार समन की अनदेखी करने और लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद आखिरकार जांच एजेंसी ने उन्हें दबोच लिया है। शांतनु सिन्हा को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद भरोसेमंद और 'दाहिना हाथ' माना जाता था।
वर्दी की आड़ में सत्ता का 'सिंडिकेट'
शांतनु सिन्हा पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस सेवा में रहते हुए निष्पक्षता की जगह सत्ताधारी दल (TMC) के एजेंट के रूप में काम किया। चुनावी रणनीतियों से लेकर पार्टी के फंड मैनेजमेंट तक में उनकी भूमिका संदिग्ध रही है। हाल ही में एक राजनीतिक मंच पर उन्हें बिना वर्दी के मुख्यमंत्री के साथ देखा गया था, जिस पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई थी।
मनी लॉन्ड्रिंग और ‘सोना पप्पू’ कनेक्शन
ईडी की जांच में शांतनु सिन्हा के तार कुख्यात अपराधी बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ से जुड़े मिले हैं। सोना पप्पू पर हत्या के प्रयास और रंगदारी के दर्जनों मामले दर्ज हैं। आरोप है कि शांतनु ने अपने पद का लाभ उठाकर इस अपराधी के अवैध कारोबार को संरक्षण दिया और बदले में करोड़ों रुपये की काली कमाई की। छापेमारी के दौरान शांतनु के ठिकानों से:
67.64 लाख रुपये के सोने के आभूषण।
भारी मात्रा में चांदी और नकदी।
एक अवैध देसी पिस्तौल बरामद की गई है।
बेटों पर भी शिकंजा: परिवार के नाम पर काला धन?
जांच की आंच अब शांतनु के परिवार तक पहुंच गई है। उनके बेटों, सयंतन और मनीष, को भी पूछताछ के लिए तलब किया गया है। ईडी को संदेह है कि अवैध कमाई का एक बड़ा हिस्सा बेटों के नाम पर चल रही कंपनियों और संपत्तियों में निवेश किया गया है। उनके बालीगंज और फर्न रोड स्थित आवासों से बेहिसाब संपत्ति के दस्तावेज भी मिले हैं।
सियासी गलियारों में हलचल
विपक्षी दल भाजपा इस गिरफ्तारी को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी जीत और 'सिंडिकेट राज' के अंत की शुरुआत बता रही है। वहीं, टीएमसी ने इसे केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग और बदले की राजनीति करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शांतनु सिन्हा ने पूछताछ के दौरान मुंह खोला, तो बंगाल सरकार के कई रसूखदार मंत्रियों और सफेदपोश नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं।