खेल डेस्क: ठीक दो दशक पहले यानी साल 2006 में जब जर्मनी में फीफा विश्व कप का आयोजन हुआ था, तब फ्रांस की नीली जर्सी पहनकर विकास धोरासू नाम का एक मिडफील्डर मैदान पर उतरा था। भले ही वह फ्रांस के लिए खेल रहे थे, लेकिन उनकी रगों में भारतीय खून दौड़ रहा था। विकास के पूर्वज आंध्र प्रदेश के विजयनगरम के रहने वाले थे और लंबे समय तक विश्व कप के मंच पर वे भारत के इकलौते 'प्रतिनिधि' रहे। लेकिन इस बार के विश्व कप में विकास धोरासू का यह 'अकेलापन' दूर होने जा रहा है।
इस बार दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर एक या दो नहीं, बल्कि चार अलग-अलग देशों के स्क्वॉड में भारतीय मूल के खिलाड़ी शामिल हैं। इन चारों खिलाड़ियों के पूर्वजों का नाता भारत की मिट्टी से रहा है। आइए जानते हैं इन 'चार मूर्तियों' के बारे में:
1. सैमुअल मुथुस्वामी (कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य - DRC)
29 वर्षीय डिफेंसिव मिडफील्डर सैमुअल मुथुस्वामी इस बार कांगो की राष्ट्रीय टीम के मुख्य स्तंभों में से एक हैं।
भारतीय कनेक्शन: मुथुस्वामी के पिता के पूर्वज कभी तमिलनाडु से पलायन कर अफ्रीका गए थे, जबकि उनकी मां कांगो से हैं।
अनुभव: मुथुस्वामी के पास यूरोपीय फुटबॉल का लंबा अनुभव है। वे नैनटेस (Nantes) क्लब के लिए खेलते हुए फ्रेंच कप भी जीत चुके हैं। कांगो के लिए अब तक 57 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके मुथुस्वामी पर टीम को विश्व कप में काफी उम्मीदें होंगी।
2. सरप्रीत सिंह (न्यूजीलैंड)
ऑकलैंड में एक पंजाबी परिवार में जन्मे सरप्रीत सिंह विश्व फुटबॉल में एक जाना-माना नाम बन चुके हैं। 27 वर्षीय यह अटैकिंग मिडफील्डर वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया की ए-लीग टीम वेलिंगटन फोनिक्स के लिए खेलता है।
भारतीय कनेक्शन: सरप्रीत का पूरा परिवार न्यूजीलैंड में रहता है, लेकिन पंजाब से उनका नाता आज भी गहरा है। साल 2018 में वे इंटरकॉन्टिनेंटल कप में कीवी रिजर्व टीम की ओर से भारत में खेलने भी आए थे।
बड़ा नाम: सरप्रीत सिंह के पास जर्मनी के विश्व प्रसिद्ध क्लब 'बायर्न म्यूनिख' (Bayern Munich) की जर्सी पहनने का भी गौरवशाली अनुभव है। न्यूजीलैंड की विश्व कप में वापसी के पीछे सरप्रीत का बहुत बड़ा योगदान माना जाता है।
3. निशन वेलुपिल्ले (ऑस्ट्रेलिया)
ऑस्ट्रेलियाई घरेलू फुटबॉल में निशन वेलुपिल्ले एक बेहद लोकप्रिय और जाना-माना चेहरा हैं। 25 वर्षीय यह विंगर मेलबर्न विक्ट्री के लिए 'ए' लीग में 100 से अधिक मैच खेल चुका है।
भारतीय कनेक्शन: निशन के पिता श्रीलंकाई-तमिल हैं और उनकी मां एक एंग्लो-इंडियन (Anglo-Indian) हैं।
प्रदर्शन: पिछले दो सालों से वे ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय टीम के नियमित सदस्य हैं और उन्होंने चीन और इंडोनेशिया जैसी टीमों के खिलाफ शानदार गोल भी दागे हैं।
4. थासिन मोहम्मद जामशेद (कतर)
पूर्व में उल्लेखित तीनों खिलाड़ियों की तुलना में 19 वर्षीय **थासिन मोहम्मद जामशेद काफी युवा और उभरते हुए स्टार हैं। वे कतर स्टार्स लीग में 'अल दुहैल' (Al Duhail) क्लब के लिए विंगर के रूप में खेलते हैं।
भारतीय कनेक्शन: थासिन भले ही कतर के लिए खेलते हों, लेकिन उनका परिवार मूल रूप से भारत के केरल राज्य का रहने वाला है। थासिन के पिता जामशेद खुद कालीकट विश्वविद्यालय के लिए नियमित फुटबॉल खेला करते थे, जो बाद में काम के सिलसिले में कतर चले गए। थासिन ने अपने पिता की देखरेख में ही फुटबॉल के गुर सीखे हैं।
कतर की सीनियर राष्ट्रीय टीम के लिए वे अब तक तीन मैच खेल चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि करीब दो साल पहले विश्व कप क्वालिफायर में जब भारत और कतर का मैच हुआ था, तब थासिन कतर की रिजर्व बेंच पर मौजूद थे।
भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह विश्व कप बेहद खास होने जा रहा है। भले ही मैदान पर तिरंगा लहराता हुआ न दिखे, लेकिन जब भी ये चार खिलाड़ी गेंद को लेकर आगे बढ़ेंगे, तो करोड़ों भारतीय फैंस का दिल भी इनके साथ धड़केगा।