पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध हिलसा मछली अब गुजरात के तटीय और नदीय क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। हाल के वर्षों में नर्मदा नदी में हिलसा की पकड़ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मछुआरे और स्थानीय लोग इस बदलाव को लेकर उत्साहित हैं क्योंकि यह मछली पारंपरिक रूप से बंगाल और बांग्लादेश से जुड़ी मानी जाती रही है। बदलते समुद्री करंट और पर्यावरणीय परिस्थितियों ने हिलसा को गुजरात के पानी की ओर आकर्षित किया है। यह प्रवृत्ति मत्स्य पालन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।
नर्मदा में अनुकूल परिस्थितियां
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर पानी समुद्र में बहता है। भरूच के पास नर्मदा के निचले हिस्से में मीठे और खारे पानी का आदर्श मिश्रण हिलसा के प्रजनन के लिए उपयुक्त माहौल बना रहा है। यह मिश्रण मछली के अंडे देने और बच्चे पालने के लिए आदर्श माना जाता है। नर्मदा का यह क्षेत्र अब हिलसा के लिए आकर्षक प्रजनन स्थल बन गया है। अनुकूल जल गुणवत्ता और पोषक तत्वों की उपलब्धता ने मछली को यहां बसने के लिए प्रेरित किया है। स्थानीय मछुआरों को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
हिलसा मछली की प्रवासी प्रकृति
कामधेनु विश्वविद्यालय गांधीनगर के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के सहायक प्रोफेसर आरबी वाला और एएम परमार ने बताया कि हिलसा एक एनाड्रोमस प्रवासी मछली है। यह अपना ज्यादातर जीवन समुद्र में बिताती है लेकिन प्रजनन के लिए नदियों के मीठे पानी की ओर पलायन करती है। प्रजनन के मौसम में यह मछली नदियों में प्रवेश करती है और अनुकूल स्थान पर अंडे देती है। नर्मदा में मिलने वाला मीठा-खारा मिश्रण इसकी इस प्रवृत्ति के अनुकूल साबित हो रहा है। प्रवासी प्रकृति के कारण हिलसा आसानी से नए क्षेत्रों की ओर रुख कर सकती है जब पारंपरिक स्थल प्रभावित होते हैं।
पारंपरिक क्षेत्रों में गिरावट के कारण
पहले बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल की गंगा-हुगली नदी प्रणाली हिलसा के प्रमुख प्रजनन क्षेत्र थे। लेकिन फरक्का बैराज, नदियों पर बढ़ते निर्माण, नदी की गहराई में बदलाव, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने पारंपरिक प्रवास और प्रजनन क्षेत्रों को प्रभावित किया है। इन कारणों से हिलसा को वैकल्पिक मार्ग और स्थल तलाशने पड़े हैं। नर्मदा जैसे क्षेत्रों में अनुकूल परिस्थितियां मिलने से मछली ने अपना रुख बदल लिया है। पारंपरिक क्षेत्रों में कमी के बावजूद नई जगहों पर उपस्थिति बढ़ना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि नर्मदा में हिलसा का बढ़ता प्रजनन स्थानीय मत्स्य उद्योग के लिए नया अध्याय खोल सकता है। अगर यह प्रवृत्ति बनी रहती है तो गुजरात हिलसा उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। संरक्षण और टिकाऊ मछली पकड़ने की नीतियों से इस अवसर का बेहतर लाभ उठाया जा सकता है। जलवायु परिवर्तन और नदी प्रबंधन के असर को देखते हुए ऐसे वैकल्पिक क्षेत्रों का विकास जरूरी हो गया है। नर्मदा में हिलसा का बसना पर्यावरणीय अनुकूलन का उदाहरण प्रस्तुत करता है और भविष्य में और अध्ययन की जरूरत बताता है।