शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। 30 जून से 11 अगस्त के बीच प्रदेश में कुल 163 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 70 मौतें मानसून से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुईं, जबकि 93 लोगों की जान सड़क हादसों में गई। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, महज 43 दिनों से ज्यादा की अवधि में प्रदेश को 910.34 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस दौरान 257 लोग घायल हुए हैं, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता है।
पेड़ और चट्टानों से गिरने से सबसे ज्यादा मौतें
मानसून के दौरान प्राकृतिक हादसों में सबसे ज्यादा मौतें पेड़ या ऊंची चट्टानों से गिरने के कारण हुई हैं। इस वजह से प्रदेश में 23 लोगों की जान गई। इनमें शिमला में 6, कुल्लू में 5, चंबा में 4, मंडी में 3, कांगड़ा में 2 और हमीरपुर, किन्नौर व सिरमौर में एक-एक मौत दर्ज की गई है।
लैंडस्लाइड ने लाहौल-स्पीति में मचाई सबसे ज्यादा तबाही
प्रदेश में भूस्खलन (Landslide) से 14 लोगों की मौत हुई है। इनमें अकेले लाहौल-स्पीति में 13 लोगों की जान गई, जबकि चंबा में एक व्यक्ति की मौत हुई है।
पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम के दौरान अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो गई है।
सांप के काटने से 7 लोगों की मौत
मानसून के दौरान सांप के काटने की घटनाएं भी जानलेवा साबित हुई हैं। प्रदेश में अब तक 7 लोगों की मौत सांप के काटने से हुई है।
कांगड़ा में सबसे ज्यादा 4 मौतें दर्ज हुई हैं, जबकि सिरमौर में 2 और ऊना में एक व्यक्ति की मौत हुई।
करंट की चपेट में भी गई 6 जान
बारिश के दौरान बिजली के तार और अन्य विद्युत उपकरणों से जुड़े हादसों में भी लोगों की जान गई है। प्रदेश में करंट लगने से 6 मौतें हुई हैं।
कांगड़ा और ऊना में 2-2, जबकि हमीरपुर और शिमला में एक-एक मौत दर्ज की गई है।
इसके अलावा डूबने से 4, आगजनी से 1 और अचानक आई बाढ़ से कांगड़ा में 1 व्यक्ति की मौत हुई है।
सड़क हादसों में 93 लोगों की मौत
मानसून के दौरान सड़क दुर्घटनाएं भी बड़ी चिंता बनकर सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में 93 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई।
जिला स्तर पर चंबा सबसे ज्यादा प्रभावित रहा।
- चंबा: 16 मौतें
- कुल्लू: 13
- सिरमौर: 12
- शिमला: 11
- कांगड़ा: 10
- सोलन: 8
- ऊना: 6
- किन्नौर: 5
- बिलासपुर: 4
- लाहौल-स्पीति: 4
- मंडी: 3
- हमीरपुर: 1
खराब मौसम, पहाड़ी सड़कों की स्थिति और कम दृश्यता के कारण मानसून के दौरान सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
910 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार 30 जून से 11 अगस्त तक हिमाचल प्रदेश को 910.34 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
प्राकृतिक आपदाओं, सड़क दुर्घटनाओं, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य घटनाओं ने प्रदेश के जनजीवन और बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया है।
मानसून अभी जारी है, ऐसे में आने वाले दिनों में भी संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है। लोगों से भी मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और जोखिम वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की जाती है।