भोपाल, 12 अगस्त 2026 | मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस को लेकर मंगलवार को दिनभर बनी भ्रम की स्थिति अब दूर हो गई है। शुरुआत में शिक्षकों को सुबह 10 बजे से पहले ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने की जानकारी सामने आई थी। बाद में लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया कि सरकारी शिक्षकों को सुबह 10:30 बजे तक ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होगी।
विभाग की व्यवस्था में 15 मिनट का ग्रेस पीरियड भी शामिल रहेगा। हालांकि संचालनालय ने यह संकेत दिया है कि ग्रेस अवधि को रोजाना देरी से आने की नियमित छूट नहीं माना जाएगा। शिक्षकों से निर्धारित स्कूल समय के अनुसार परिसर में पहुंचकर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की अपेक्षा की गई है।
अब क्या रहेगा ई-अटेंडेंस का नियम?
नई व्यवस्था को सरल शब्दों में इस तरह समझा जा सकता है:
| विषय | नियम |
|---|---|
| ई-अटेंडेंस की समयसीमा | सुबह 10:30 बजे तक |
| ग्रेस पीरियड | 15 मिनट |
| समय के बाद Attendance | देरी का कारण बताना होगा |
| बार-बार देरी | विभागीय कार्रवाई संभव |
| लगातार लापरवाही | नियमानुसार वेतन कटौती हो सकती है |
| बाढ़ या असुरक्षित रास्ता | प्राचार्य को सूचना देकर राहत |
| तकनीकी समस्या | विभागीय प्रक्रिया के अनुसार परीक्षण |
ई-अटेंडेंस का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और निगरानी व्यवस्था को पारदर्शी बनाना बताया गया है। मोबाइल आधारित प्रणाली में नेटवर्क की समस्या वाले क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होने की बात भी राज्य की ओर से अदालत में कही जा चुकी है।
देरी हुई तो बताना होगा कारण
लोक शिक्षण आयुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिक्षक निर्धारित समय तक विद्यालय पहुंचकर अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करें। यदि किसी शिक्षक की ई-अटेंडेंस 10:30 बजे के बाद दर्ज होती है, तो उससे देरी का कारण पूछा जा सकता है।
बीमारी, रास्ता बंद होने, आकस्मिक प्रशासनिक कार्य, परिवहन समस्या या दूसरी वास्तविक परिस्थितियों की जांच स्थानीय स्तर पर की जा सकती है। केवल एक बार देर होने पर वेतन अपने आप नहीं कटेगा, लेकिन लगातार बिना उचित कारण देरी या ई-अटेंडेंस में लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई संभव है। विभाग पहले भी ई-अटेंडेंस को वेतन भुगतान और जवाबदेही से जोड़ने के निर्देश जारी कर चुका है।
शिक्षकों को परेशान करना उद्देश्य नहीं
लोक शिक्षण संचालनालय का कहना है कि ई-अटेंडेंस प्रणाली का उद्देश्य शिक्षकों को परेशान करना या अनावश्यक दंड देना नहीं है। इसका प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक निर्धारित समय में स्कूल पहुंचें और उनकी उपस्थिति का रियल टाइम रिकॉर्ड उपलब्ध हो।
इस डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल स्कूलों की निगरानी, प्रशासनिक निर्णय और उपस्थिति संबंधी विवादों के समाधान में किया जा सकता है। विभाग ने जिला अधिकारियों से नियम लागू करते समय वास्तविक एवं आकस्मिक परिस्थितियों पर भी ध्यान देने को कहा है।
उफनते नदी-नाले पार करके स्कूल पहुंचने की जरूरत नहीं
मध्य प्रदेश के कई ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। ऐसे में विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोई शिक्षक केवल ई-अटेंडेंस दर्ज करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर जलमग्न मार्ग या उफनता नाला पार करने के लिए बाध्य नहीं होगा।
यदि स्कूल का रास्ता बंद है, पुलिया पर पानी बह रहा है या आवागमन असुरक्षित है, तो शिक्षक अपने प्राचार्य अथवा संकुल प्राचार्य को WhatsApp समूह के माध्यम से स्थिति की सूचना दे सकेंगे। ऐसी सूचना को संबंधित अधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर स्वीकार करेंगे।
शिक्षकों को संभव हो तो जलभराव, बंद रास्ते या प्रशासनिक रोक से जुड़ी अधिकृत सूचना सुरक्षित रखनी चाहिए। इससे बाद में उपस्थिति या वेतन से संबंधित विवाद की स्थिति में वास्तविक परिस्थिति प्रमाणित करने में मदद मिल सकती है।
अलग-अलग जिलों के आदेशों में था समय का अंतर
ई-अटेंडेंस का समय स्पष्ट नहीं होने की एक वजह विभिन्न जिलों से जारी अलग-अलग निर्देश भी थे। सागर और मंदसौर के जिला शिक्षा अधिकारियों के आदेशों में ऑनलाइन हाजिरी के अलग समय का उल्लेख सामने आया था।
लोक शिक्षण संचालनालय ने ऐसे जिला स्तरीय आदेशों को संशोधित करने और पूरे प्रदेश में एक समान समय व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए संचालनालय के 10:30 बजे वाले स्पष्टीकरण को आधार माना जाएगा।
अवकाश और ऐप की तकनीकी समस्याओं पर होगी बैठक
ई-अटेंडेंस ऐप में अवकाश दर्ज करने, स्वीकृत छुट्टी के बावजूद अनुपस्थित दिखने, नेटवर्क नहीं मिलने और तकनीकी त्रुटि जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए विभाग तकनीकी समिति के साथ बैठक करेगा। तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में शिक्षकों को स्क्रीनशॉट, समय और शिकायत संख्या सुरक्षित रखनी चाहिए। इससे जिला आईटी सेल या विभागीय अधिकारियों के सामने समस्या का परीक्षण आसान हो सकेगा। अवकाश संबंधी अंतिम प्रक्रिया विभाग की आगामी तकनीकी व्यवस्था और निर्देशों से स्पष्ट होगी।
शिक्षक संगठनों ने उठाए आवास और सुरक्षित आवागमन के मुद्दे
शिक्षक संगठनों का कहना है कि प्रदेश के कई सरकारी स्कूल दूरस्थ गांवों, जंगलों और ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां नियमित सार्वजनिक परिवहन और सुरक्षित आवास की व्यवस्था नहीं है। बरसात में खराब सड़कें और उफनते नदी-नाले शिक्षकों के लिए गंभीर जोखिम पैदा करते हैं।
संगठनों ने सरकार से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक आवास, सुरक्षित परिवहन, बेहतर इंटरनेट, सड़क संपर्क और ग्रामीण भत्ते जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वे तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन डिजिटल हाजिरी लागू करते समय जमीनी परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
शिक्षकों पर क्या पड़ेगा असर?
- समय की स्थिति स्पष्ट: शिक्षकों को अब 10 बजे और 10:30 बजे के अलग-अलग निर्देशों के बीच भ्रम नहीं रहेगा।
- देर से आने पर जवाबदेही: निर्धारित समय के बाद उपस्थिति दर्ज होने पर कारण देना पड़ेगा और लगातार देरी पर कार्रवाई हो सकती है।
- बारिश में सुरक्षा: जान जोखिम में डालकर उफनते नाले या जलमग्न रास्ते पार करने की जरूरत नहीं होगी।
- तकनीकी प्रमाण जरूरी: नेटवर्क या ऐप की समस्या होने पर स्क्रीनशॉट और तत्काल सूचना महत्वपूर्ण होगी।
- जिला स्तर पर समान नियम: अलग-अलग समय वाले आदेशों को संशोधित कर संचालनालय की व्यवस्था लागू की जाएगी।