कोलकाता - सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उन बैंक खातों के मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में फ्रीज किया था। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को संतुलित माना, जिसके तहत पार्टी को खातों से रोजमर्रा के जरूरी खर्च करने की सीमित अनुमति दी गई थी।
TMC ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी याचिका
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने TMC की याचिका पर सुनवाई की। पार्टी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके तीन HDFC बैंक खातों को अपनी मर्जी से संचालित करने की अनुमति नहीं दी गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने पार्टी के दैनिक और आवश्यक खर्चों के लिए इन खातों से सीमित भुगतान की अनुमति पहले ही दे रखी है।
स्पेशल ऑफिसर की निगरानी में खर्च
हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, खातों से जरूरी खर्च करने के लिए एक स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया गया है। पार्टी को इसी अधिकारी की निगरानी में निर्धारित खर्च करने की अनुमति है। सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे पार्टी का रोजमर्रा का काम पूरी तरह बंद नहीं होता।
‘मुख्य याचिका में उठाएं सभी मुद्दे’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले से जुड़े सभी कानूनी और अन्य मुद्दों को कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित मुख्य याचिका के दौरान उठाया जा सकता है। जस्टिस एमएम सुंदरेश ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट का 9 जुलाई का आदेश TMC के दैनिक कामकाज को पूरी तरह रोकने वाला नहीं है। इस आधार पर शीर्ष अदालत ने फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
ED का 440 करोड़ रुपये का दावा
ED के मुताबिक, TMC के तीन HDFC बैंक खातों में करीब 440 करोड़ रुपये की राशि मौजूद है। जांच एजेंसी का कहना है कि खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई कुछ संदिग्ध फंड ट्रांसफर की जांच से जुड़ी है। ED की जांच के अनुसार, अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच Carewell Aviation India और उससे जुड़ी एक अन्य कंपनी को कथित तौर पर रकम ट्रांसफर की गई। एजेंसी इन लेन-देन को एक विमान और हेलिकॉप्टर की खरीद से जोड़कर जांच कर रही है।
7 जुलाई को हुई थी कार्रवाई
ED ने 7 जुलाई को कार्रवाई करते हुए TMC से जुड़े इन तीन खातों समेत कुल छह बैंक खातों को फ्रीज किया था। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद खातों के संचालन से जुड़े विवाद पर आगे की सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित मुख्य मामले के तहत होगी।