हरिद्वार। सावन महीने की शिवरात्रि के पावन अवसर पर मंगलवार को धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह शिवमय नजर आई। सुबह से ही प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। कनखल स्थित पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर से लेकर ऋषिकेश के वीरभद्र महादेव मंदिर तक हर तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंज रहे हैं। शिवभक्त गंगाजल, दूध, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा और फल-फूल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं। श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
दक्षेश्वर महादेव मंदिर में लगी लंबी कतार
कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भक्त गंगाजल और दूध से भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि हर महीने कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात और चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि आती है, जबकि फाल्गुन मास की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में कांवड़ परंपरा के कारण सावन की शिवरात्रि का विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु पूरे सावन भगवान शिव की पूजा नहीं कर पाते, वे शिवरात्रि के दिन गंगाजल और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करें तो विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
भगवान शिव की ससुराल है कनखल
कनखल को भगवान शिव की ससुराल और राजा दक्ष की राजधानी से जुड़ा पौराणिक स्थान माना जाता है। यही वजह है कि दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सावन शिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिलती है।
श्रद्धालु ज्योति शर्मा ने कहा कि यहां जल चढ़ाने का विशेष महत्व माना जाता है। उनके मुताबिक भोलेनाथ को जल अर्पित करने से ही भक्तों को विशेष संतोष और आस्था की अनुभूति होती है।
वीरभद्र महादेव मंदिर में भी उमड़ी भीड़
ऋषिकेश के पौराणिक वीरभद्र महादेव मंदिर में भी मंगलवार सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने लंबी कतारों में लगकर भगवान शिव का जल, दूध, पंचामृत और गन्ने के रस से अभिषेक किया।
मंदिर में फल, फूल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करने के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिर परिसर लगातार ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजता रहा।
वीरभद्र महादेव मंदिर की क्या है मान्यता?
श्रद्धालुओं के मुताबिक वीरभद्र महादेव मंदिर का पौराणिक और धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु कृष्णा बैलवाल ने बताया कि मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। उन्होंने परिवार के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
श्रद्धालु बसंती शर्मा ने बताया कि सावन के महीने में दूर-दराज से लोग यहां भोलेनाथ के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि इसी क्षेत्र में भगवान वीरभद्र प्रकट हुए थे, जिसके बाद इस स्थान का नाम वीरभद्र पड़ा।
भक्त बोले- महादेव पूरी करते हैं मनोकामनाएं
श्रद्धालु ममता नयाल ने कहा कि वीरभद्र महादेव मंदिर बेहद प्राचीन और आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। सावन शिवरात्रि पर मंदिर में परिवार के साथ पहुंचकर उन्होंने भी भगवान भोलेनाथ से सुख-शांति और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की।
‘एक लोटा जल और सभी समस्याओं का हल’
वीरभद्र मंदिर के प्रबंधक महंत राजगिरी महाराज ने मंदिर के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यहां भगवान शंकर के रुद्र रूप वीरभद्र की आराधना होती है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि भक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं और अपनी मनोकामना रखते हैं। मंदिर में अखाड़ा परिषद निरंजनी के श्री महंत डॉ. रवींद्र पुरी की ओर से भंडारे की व्यवस्था भी की जाती है।
महंत राजगिरी महाराज ने कहा कि महादेव के लिए दिखावे से ज्यादा भक्ति महत्वपूर्ण है। इसी भावना को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ‘एक लोटा जल और सभी समस्याओं का हल’। सावन में भगवान शिव को जल अर्पित करने की परंपरा को श्रद्धालु विशेष पुण्य और आस्था से जोड़कर देखते हैं।
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के बाद शिवरात्रि का उत्साह
सावन के दौरान हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के कारण पहले से ही बड़ी संख्या में शिवभक्त पहुंच रहे हैं। शिवरात्रि के अवसर पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ गई है। गंगा स्नान के बाद भक्त विभिन्न शिवालयों में पहुंचकर जलाभिषेक कर रहे हैं। धर्मनगरी में सुबह से ही ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के बीच भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है।