नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महिला की अश्लील और आपत्तिजनक डीपफेक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और रत्ना सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही अदालत ने टेक कंपनी मेटा (Meta) को निर्देश दिया है कि संबंधित वेब लिंक मिलने के 24 घंटे के भीतर अपने सभी प्लेटफॉर्म से ऐसी सामग्री तुरंत हटाए। वहीं, दिल्ली पुलिस को पीड़ित महिला की जान के खतरे को देखते हुए 24 घंटे सुरक्षा देने और उसका पता गोपनीय रखने के आदेश दिए हैं।
"यह सिर्फ एक महिला का नहीं, देश के प्रधानमंत्री से जुड़ा मामला है": हाईकोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गिरीश ने स्थिति को अत्यंत गंभीर और असाधारण करार दिया। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "यह एक असाधारण स्थिति है जहां मामला सिर्फ एक महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के प्रधानमंत्री से जुड़ा मुद्दा भी है।" पीठ ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस इस मामले में पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई करे।इससे पूर्व, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उमेश शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के सामने मामले का विशेष उल्लेख करते हुए त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसके बाद खंडपीठ ने मामले को सूचीबद्ध करने की अनुमति दी। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एआई (AI) टूल से तैयार की गई डीपफेक तस्वीर
याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित CJP के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पार्टी नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं ने याचिकाकर्ता की निजी तस्वीर अनधिकृत रूप से हासिल की। इसके बाद एआई (AI) आधारित फेस-स्वैपिंग उपकरणों का इस्तेमाल कर उसका चेहरा प्रधानमंत्री के साथ एक बेहद अश्लील और आपत्तिजनक फोटो में मॉर्फ कर सोशल मीडिया पर फैला दिया। पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि तस्वीर वायरल होने के बाद से ही उसे लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
दिल्ली पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि दर्ज प्राथमिकी (FIR) पर अब तक की गई कार्रवाई के बारे में एक सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करे। इसके अलावा, पीड़िता को प्रदान की गई सुरक्षा और उसके गोपनीय पते की स्थिति रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उसकी सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक न हो।