लखनऊ: उत्तरप्रदेश में मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी है। मंगलवार सुबह से मेरठ, संभल, बिजनौर और मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। तेज बारिश के कारण कई शहरों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। मेरठ और संभल में गलियां और कॉलोनियां पानी से लबालब हो गईं, जबकि कई घरों और दुकानों में करीब एक फीट तक पानी भर गया। दूसरी ओर मुजफ्फरनगर में कांवड़ रूट और शिव चौक पर 2 से 3 फीट तक पानी जमा हो गया।
मेरठ और संभल में घरों-दुकानों में घुसा पानी
मेरठ और संभल में मंगलवार सुबह हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई। गलियां और कॉलोनियां पानी में डूब गईं। कई घरों और दुकानों के अंदर करीब एक फीट तक पानी पहुंच गया, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी जमा होने से लोगों का आवागमन भी प्रभावित हुआ। स्थानीय स्तर पर जल निकासी की व्यवस्था को लेकर भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुजफ्फरनगर में 2-3 फीट पानी, अफसरों ने लिया जायजा
मुजफ्फरनगर में बारिश के बाद कांवड़ रूट और शिव चौक पर करीब 2 से 3 फीट तक पानी भर गया। सड़कों पर पानी जमा होने से आवाजाही प्रभावित हुई।स्थिति का जायजा लेने के लिए डीएम उमेश मिश्रा और एसएसपी संजय वर्मा भी बारिश के बीच मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारी घुटनों तक भरे पानी के बीच उतरे और जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया।
46 जिलों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के 46 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें आगरा में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मेरठ, संभल, बिजनौर और मुजफ्फरनगर समेत 10 शहरों में सुबह से ही बारिश का सिलसिला जारी रहा।लखनऊ और आसपास के इलाकों में भी मंगलवार को बूंदाबांदी देखने को मिली। मौसम में बदलाव और लगातार बारिश के कारण कई जिलों में लोगों को जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद कम है।
पहाड़ों की बारिश से यूपी की नदियां उफान पर
उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में बारिश के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही तेज बारिश का असर भी दिखाई दे रहा है। कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। गंगा और यमुना समेत कई नदियां उफान पर हैं।नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बिजनौर और फर्रुखाबाद में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई हैं और गांवों में आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।
वाराणसी में घाटों की सीढ़ियां डूबीं
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। सभी 84 घाटों को आपस में जोड़ने वाले रास्ते भी जलमग्न हो गए हैं।बढ़ते जलस्तर को देखते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर के छह द्वारों में से मुख्य काशी विश्वनाथ मंदिर घाट (गंगा द्वार) को बंद कर दिया गया है। गंगा के बढ़ते पानी के कारण घाट क्षेत्र में गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
मथुरा-वृंदावन में भी यमुना का जलस्तर बढ़ा
मथुरा में यमुना नदी का पानी घाटों की सीढ़ियों तक पहुंच गया है। वृंदावन में केशी घाट का परिक्रमा मार्ग भी पानी में डूब गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने से घाट क्षेत्र में आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिजनौर और फर्रुखाबाद में बाढ़ जैसे हालात
बिजनौर और फर्रुखाबाद में गंगा का पानी कई इलाकों में पहुंच गया है। कुछ स्थानों पर गंगा का पानी हाईवे के ऊपर से बह रहा है। आसपास की कई सड़कें भी जलमग्न हो गई हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का असर अधिक दिखाई दे रहा है। कई गांवों में आवागमन के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है।
सहारनपुर में नदियों में आया सैलाब
सहारनपुर में भारी बारिश के बाद गंडराव नदी और शाकंभरी मंदिर के पास बहने वाली बरसाती नदी में अचानक पानी बढ़ गया। तेज बहाव के कारण मंदिर के प्रवेश द्वार के पास करीब दो फीट तक पानी भर गया।मिर्जापुर क्षेत्र में तेज बहाव के कारण रपटा पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद नदी का पानी दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे के ऊपर से बहने लगा। हाईवे पर पानी आने से यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन गई है।
बारिश और बाढ़ से बढ़ी लोगों की परेशानी
उत्तरप्रदेश के कई हिस्सों में एक ओर लगातार बारिश से शहरों में जलभराव की समस्या बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर नदियों का बढ़ता जलस्तर ग्रामीण और नदी किनारे के क्षेत्रों के लिए चुनौती बन गया है। 46 जिलों में बारिश के अलर्ट के बीच प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में सतर्क रहने की जरूरत है।