लखनऊ - उत्तर प्रदेश सरकार की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना (VSSY) पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने तथा उनके पारंपरिक हुनर को रोजगार का बेहतर माध्यम बनाने के उद्देश्य से संचालित राज्य स्तरीय योजना है। इसके जरिए अलग-अलग पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
किन कारीगरों के लिए है योजना?
यह योजना मुख्य रूप से बढ़ई, दर्जी, नाई, कुम्हार, लोहार, मोची, राजमिस्त्री, बांस-बेंत का सामान बनाने वाले, धोबी, सुनार और हलवाई जैसे पारंपरिक काम करने वाले कारीगरों के लिए है। इसका उद्देश्य इन व्यवसायों से जुड़े लोगों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उन्हें अपने हुनर के जरिए बेहतर आजीविका कमाने में मदद करना है।
प्रशिक्षण पर जोर
योजना के तहत पात्र कारीगरों को उनके संबंधित ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के जरिए पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक और बेहतर कार्यप्रणाली से जोड़ने की कोशिश की जाती है, ताकि कारीगर अपने उत्पाद और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार कर सकें।
PM विश्वकर्मा योजना से अलग
यह ध्यान रखना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और केंद्र सरकार की PM विश्वकर्मा योजना दो अलग-अलग योजनाएं हैं। केंद्र सरकार ने PM विश्वकर्मा योजना सितंबर 2023 में शुरू की थी, जिसके तहत 18 पारंपरिक ट्रेड्स को शामिल किया गया है। इसमें पात्र लाभार्थियों को टूलकिट प्रोत्साहन के रूप में ₹15,000 तक की सहायता और प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड दिया जाता है।
वहीं, उत्तर प्रदेश की VSSY राज्य सरकार की अपनी योजना है और इसका उद्देश्य प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण देकर उनके हुनर को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना है।
योजना का मकसद
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के जरिए सरकार पारंपरिक व्यवसायों को संरक्षण देने के साथ-साथ कारीगरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रही है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
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