नई दिल्ली - महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को अब चावल की बढ़ती कीमतों ने भी परेशान करना शुरू कर दिया है। चीनी के दामों में बढ़ोतरी के बाद चावल के थोक भाव में भी तेजी देखने को मिल रही है। इससे आने वाले दिनों में घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
सोना मंसूरी और बासमती के दाम बढ़े
बाजार में चावल की प्रमुख किस्मों के भाव में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोना मंसूरी चावल की कीमत पहले करीब 4,500 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो बढ़कर अब 5,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। वहीं, बासमती चावल का भाव 9,200 रुपये से बढ़कर 9,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। थोक बाजार में आई इस तेजी का असर धीरे-धीरे खुदरा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
मौसम बना कीमत बढ़ने की बड़ी वजह
व्यापारियों के मुताबिक चावल की कीमतों में तेजी के पीछे मौसम की स्थिति भी एक महत्वपूर्ण कारण है। पिछले करीब एक महीने से कई इलाकों में मौसम अनुकूल नहीं रहा है। बारिश और अन्य मौसमी परिस्थितियों का असर धान की आवक और उत्पादन पर पड़ रहा है। इसका सीधा प्रभाव बाजार में उपलब्धता और सप्लाई पर दिखाई दे रहा है।
सप्लाई चेन पर भी दबाव
व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव और बदलती परिस्थितियों के कारण भी सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के साथ-साथ परिवहन और बाजार की परिस्थितियों में बदलाव का असर विभिन्न कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है। चावल भी इससे अछूता नहीं है।
थोक बाजार में बढ़ी कीमत
मोतीगंज व्यापार समिति के अध्यक्ष महावीर प्रसाद के अनुसार, चावल के थोक मूल्यों में स्पष्ट बढ़ोतरी हुई है। उनके मुताबिक धान और चावल का उत्पादन काफी हद तक मौसम पर निर्भर करता है। जब मौसम की स्थिति अनुकूल नहीं रहती, तो उत्पादन और बाजार में आने वाली आवक दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
आम लोगों की बढ़ सकती है परेशानी
चावल देश के करोड़ों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर घरेलू रसोई के बजट पर पड़ सकता है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए लगातार बढ़ती खाद्य कीमतें चिंता का विषय बन सकती हैं। फिलहाल बाजार में कीमतों में तेजी के पीछे उत्पादन, आवक और सप्लाई से जुड़े कई कारण बताए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में नई फसल की स्थिति और बाजार में आवक यह तय करेगी कि चावल के दाम स्थिर होते हैं या इनमें और बढ़ोतरी देखने को मिलती है।