MP Proforma Promotion 2026: मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी से रिटायर हुए हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने ऐसे कर्मचारियों को प्रोफार्मा प्रमोशन देने का फैसला किया है, जो तय सेवा अवधि पूरी करने के बावजूद पदोन्नति के बिना सेवानिवृत्त हो गए। इस व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को प्रमोशन का वास्तविक पदनाम नहीं मिलेगा, बल्कि पदोन्नत पद के आधार पर काल्पनिक वेतन (Notional Pay) निर्धारित किया जाएगा। इसका असर पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े अन्य लाभों पर पड़ेगा। बताया गया है कि जून 2026 तक 36 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके करीब 20 हजार कर्मचारी इस व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं।
क्या है प्रोफार्मा प्रमोशन?
प्रोफार्मा प्रमोशन का मतलब ऐसी पदोन्नति से है, जिसमें कर्मचारी को पदोन्नत पद पर वास्तविक रूप से नियुक्त नहीं किया जाता, लेकिन उसके वेतन और सेवा लाभों की गणना उस पद को ध्यान में रखकर की जाती है। यानी रिटायर कर्मचारी को पदोन्नत पद पर काम करने का नया पदनाम नहीं मिलेगा। इसके बजाय उसके लिए पदोन्नत पद के अनुरूप काल्पनिक वेतन तय किया जाएगा। इसी आधार पर पेंशन समेत पात्र सेवानिवृत्ति लाभों की गणना की जा सकती है। सरकार का यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय तक सेवा करने के बावजूद विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया पूरी न होने के कारण प्रमोशन हासिल नहीं कर सके।
जून 2026 में 36 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी पात्र
प्रोफार्मा प्रमोशन की व्यवस्था उन कर्मचारियों के लिए लागू की जा रही है, जिन्होंने जून 2026 में 36 साल की सेवा पूरी कर ली है। बताया गया है कि करीब 20 हजार कर्मचारी ऐसे हैं, जो बिना पदोन्नति के रिटायर हुए हैं और पात्रता पूरी करने की स्थिति में प्रोफार्मा प्रमोशन का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इससे ऐसे कर्मचारियों को उनकी लंबी सेवा अवधि के अनुरूप वित्तीय लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है।
30 जून को रिटायर हुए कर्मचारियों के नाम आदेश में नहीं आए
इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC की बैठक से जुड़ा है। 3 जुलाई को हुई बैठक में 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले पात्र कर्मचारियों के नामों को शामिल किया गया था। हालांकि, जब पदोन्नति से संबंधित आदेश जारी हुआ तो इन कर्मचारियों के नाम उसमें शामिल नहीं थे। इसके चलते करीब 20 हजार कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो गए। अब सरकार की प्रोफार्मा प्रमोशन व्यवस्था से इन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
रिटायर कर्मचारियों को क्या मिलेगा फायदा?
इस व्यवस्था में कर्मचारियों को वास्तविक पदोन्नति वाला पदनाम नहीं मिलेगा। इसके बजाय पदोन्नत पद के आधार पर काल्पनिक वेतन निर्धारित किया जाएगा। इसका सबसे बड़ा असर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना पर पड़ सकता है। यानी कर्मचारी के रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों को पात्रता के अनुसार संशोधित किया जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी को मिलने वाला वास्तविक लाभ उसकी सेवा अवधि, विभागीय नियमों, पात्रता और संबंधित DPC प्रक्रिया के आधार पर तय होगा।
सितंबर-अक्टूबर की DPC में किन रिकॉर्ड्स को देखा जाएगा?
सरकार ने आगामी विभागीय पदोन्नति समितियों में पात्रता तय करने के लिए गोपनीय प्रतिवेदन यानी APR (Annual Performance Report) के वर्षों को लेकर भी व्यवस्था स्पष्ट की है। 2026 में 2024-25 के लिए होने वाली DPC में 2020-21 के रिक्त पद और उसी वर्ष के APR को आधार बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए जरूरी पुराने रिकॉर्ड और रिक्तियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शामिल करना है।
दिसंबर 2026 तक की DPC के लिए पांच साल के APR देखे जाएंगे
सितंबर से नवंबर 2026 के बीच होने वाली DPC में दिसंबर 2026 तक उपलब्ध होने वाले पदों के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक के पांच साल के APR को देखा जाएगा। इससे विभागीय पदोन्नति के लिए कर्मचारियों की पात्रता का आकलन किया जाएगा। यदि किसी साल DPC आयोजित नहीं हो पाती है, तो बाद की बैठक में पहले लंबित वर्षों की चयन सूची तैयार की जाएगी। यानी पुराने लंबित मामलों को पहले निपटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
DPC प्रक्रिया से तय होगी पात्रता
प्रोफार्मा प्रमोशन का लाभ सभी रिटायर कर्मचारियों को स्वतः नहीं मिलेगा। इसके लिए संबंधित कर्मचारी की पात्रता विभागीय नियमों के अनुसार जांची जाएगी। DPC में सेवा रिकॉर्ड, APR, उपलब्ध रिक्त पद और अन्य निर्धारित मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। पात्र पाए जाने के बाद ही संबंधित कर्मचारी के मामले में आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पेंशन पर क्या होगा असर?
प्रोफार्मा प्रमोशन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पेंशन से जुड़ा है। क्योंकि पदोन्नत पद के आधार पर काल्पनिक वेतन तय किया जाएगा, इससे पात्र कर्मचारियों के पेंशन लाभों की गणना प्रभावित हो सकती है। हालांकि, वास्तविक पेंशन संशोधन और अन्य वित्तीय लाभ संबंधित सरकारी आदेश तथा कर्मचारी की व्यक्तिगत सेवा स्थिति के आधार पर निर्धारित होंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है सरकार का यह फैसला?
सरकारी सेवा में कई कर्मचारियों की पदोन्नति विभिन्न प्रशासनिक कारणों से समय पर नहीं हो पाती। इससे कर्मचारी उसी पद पर रिटायर हो जाते हैं, जबकि सेवा नियमों के तहत वे पदोन्नति के लिए पात्र हो सकते हैं। ऐसे मामलों में प्रोफार्मा प्रमोशन एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए रिटायरमेंट के बाद भी पात्र कर्मचारी को पदोन्नत पद के अनुरूप वित्तीय लाभ देने का रास्ता बनाया जाता है। मध्यप्रदेश में करीब 20 हजार कर्मचारियों के इस व्यवस्था से प्रभावित होने की बात सामने आई है। ऐसे में आने वाली DPC बैठकों और विभागीय आदेशों पर कर्मचारियों की नजर रहेगी।
आगे क्या होगा?
अब संबंधित विभागों को पात्र कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। आगामी DPC बैठकों में तय मानकों के आधार पर पात्रता की जांच की जाएगी। इसके बाद पात्र कर्मचारियों के लिए प्रोफार्मा प्रमोशन और उससे जुड़े वित्तीय लाभों की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।