नई दिल्ली: भारत में जल्द ही 10 और 20 रुपए के पॉलीमर यानी प्लास्टिक बैंक नोट देखने को मिल सकते हैं। केंद्र सरकार ने दोनों मूल्यवर्ग के पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। ट्रायल के तहत 10 और 20 रुपए के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में इसकी जानकारी दी।रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों के परीक्षण का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा था। सरकार की मंजूरी के बाद अब इनके फील्ड ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है। ट्रायल के नतीजों के आधार पर आगे इन्हें नियमित रूप से जारी करने पर फैसला लिया जाएगा।
10 और 20 रुपए के 100-100 करोड़ प्लास्टिक नोट होंगे जारी
सरकार ने फिलहाल दो छोटे मूल्यवर्ग के नोटों से पॉलीमर करेंसी का परीक्षण करने का फैसला लिया है। इसके तहत 10 रुपए के 100 करोड़ और 20 रुपए के 100 करोड़ पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे।इन नोटों को मौजूदा कागजी करेंसी के विकल्प के तौर पर तत्काल पूरी तरह लागू नहीं किया जाएगा। फील्ड ट्रायल के दौरान इनके इस्तेमाल और टिकाऊपन समेत कई पहलुओं का आंकलन किया जाएगा।
कागजी नोटों के साथ चलेंगे पॉलीमर नोट
वित्त मंत्री के मुताबिक पॉलीमर नोटों को शुरुआत में मौजूदा कागजी नोटों के साथ ही चलाया जाएगा। यानी लोगों को बाजार में एक ही मूल्यवर्ग के कागज और पॉलीमर दोनों तरह के नोट देखने को मिल सकते हैं।यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में इन नोटों को नियमित रूप से जारी करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
क्या होते हैं पॉलीमर बैंक नोट?
पॉलीमर बैंकनोट सामान्य कागज की बजाय एक विशेष प्रकार के पॉलीमर सब्सट्रेट यानी प्लास्टिक आधारित सामग्री से तैयार किए जाते हैं। देखने और इस्तेमाल करने में ये सामान्य नोटों जैसे होते हैं, लेकिन इनकी खासियत इनका अधिक टिकाऊ होना है।पानी में भीगने, धूल और गंदगी के संपर्क में आने पर इनके जल्दी खराब होने की संभावना कम होती है। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों में पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है।
30 साल या उससे ज्यादा चल सकते हैं नोट
RBI गवर्नर के अनुसार ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में पॉलीमर बैंक नोटों का लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है। इन देशों में कुछ पॉलीमर करेंसी नोट 30 साल से भी अधिक समय तक सफलतापूर्वक इस्तेमाल किए गए हैं।हालांकि भारत में इन नोटों की वास्तविक उपयोग अवधि और प्रदर्शन का आंकलन फील्ड ट्रायल के दौरान किया जाएगा।
नकली नोटों पर लगाम लगाने में मिल सकती है मदद
पॉलीमर नोटों में आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स शामिल करना अपेक्षाकृत आसान होता है। पारदर्शी विंडो और अन्य उन्नत सुरक्षा तकनीकों के इस्तेमाल से नोटों की नकल करना मुश्किल बनाया जा सकता है।
ऐसे में पॉलीमर करेंसी को नकली नोटों की समस्या से निपटने के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है। हालांकि, किसी भी करेंसी की सुरक्षा उसके डिजाइन और इस्तेमाल किए गए सिक्योरिटी फीचर्स पर निर्भर करती है।
बार-बार नोट छापने का खर्च हो सकता है कम
कागजी नोट लगातार इस्तेमाल होने के कारण जल्दी खराब हो जाते हैं। छोटे मूल्यवर्ग के नोटों का इस्तेमाल अधिक होने की वजह से उन्हें बार-बार बदलने और दोबारा छापने की जरूरत पड़ती है।
पॉलीमर नोटों की लंबी उम्र के कारण भविष्य में पुराने और खराब नोटों को बदलने की जरूरत कम हो सकती है। इससे करेंसी प्रबंधन और नोटों की छपाई पर होने वाले खर्च में भी बचत की संभावना है।
FY25 में नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च
आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में RBI ने कागजी नोटों की छपाई पर 6,372.8 करोड़ रुपए खर्च किए थे। ऐसे में यदि लंबे समय तक चलने वाली पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल बढ़ता है तो बार-बार नोट बदलने और छापने की जरूरत कम हो सकती है।हालांकि पॉलीमर नोटों की शुरुआती उत्पादन लागत, सुरक्षा व्यवस्था और इसके पूरे जीवनचक्र की लागत का आंकलन भी जरूरी होगा।
अभी सिर्फ ट्रायल, नियमित जारी होने में लगेगा समय
फिलहाल 10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों को लेकर सरकार ने केवल फील्ड ट्रायल की मंजूरी दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत बंद कर दिए जाएंगे।
ट्रायल के दौरान नोटों की टिकाऊ क्षमता, इस्तेमाल में सुविधा, सुरक्षा और करेंसी प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद ही इन्हें नियमित रूप से जारी करने को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।