कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक कथित ‘स्टिंग ऑपरेशन’ वीडियो को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आमजनता विकास पार्टी के चेयरमैन हुमायूं कबीर ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है और वीडियो को साजिश का हिस्सा बताया है।
अदालत में उठाई जांच की मांग
शुक्रवार को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच के समक्ष दायर याचिका में हुमायूं कबीर ने दावा किया कि यह वीडियो उनकी छवि धूमिल करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया है। उन्होंने अदालत से अपील की है कि वीडियो के निर्माण और प्रसार के पीछे जिम्मेदार लोगों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
चुनाव से पहले जारी हुआ था वीडियो
यह विवाद उस वीडियो से जुड़ा है जिसे तृणमूल कांग्रेस ने चुनावी माहौल के बीच सार्वजनिक किया था। वीडियो में हुमायूं कबीर पर भारतीय जनता पार्टी के साथ कथित गुप्त समझौते का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी।
AI से बनाया गया फर्जी वीडियो’ का दावा
वीडियो सामने आने के बाद ही हुमायूं कबीर ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया फर्जी कंटेंट है। अब कोर्ट में दाखिल याचिका में उन्होंने दोहराया है कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है।
बड़े पैसों के लेन-देन का आरोप
तृणमूल के कथित स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया गया था कि हुमायूं कबीर ने बीजेपी से भारी रकम की मांग की थी और इसके बदले समर्थन देने की बात कही थी। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।
AIMIM ने तोड़ा गठबंधन
वीडियो के सामने आने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने भी हुमायूं कबीर से दूरी बना ली। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पहले गठबंधन की योजना बनाई थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने गठबंधन खत्म करने का ऐलान कर दिया। अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होने की संभावना है, जिस पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।