नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना सही दिशा में आगे बढ़ रही है लेकिन उसकी गति बढ़ानी होगी। तेजी से बदल रही तकनीक के दौर में वायुसेना को अपनी क्षमताएं बढ़ाने की जरूरत है। यह बात वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कही है। वह वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के मौके पर बोल रहे थे। विदित हो कि एयर चीफ मार्शल सिंह इसी महीने अवकाश ग्रहण करेंगे। वायुसेना प्रमुख ने हल्के लड़ाकू विमान एमके-1ए के मिलने में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विमान प्राप्ति का सिलसिला शुरू होने के लिए वायुसेना निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड यानी HAL के लगातार संपर्क में है। हम HAL के वादे के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। हमें पूरा भरोसा है कि इस वित्त वर्ष में हमें उचित संख्या में लड़ाकू विमान मिल जाएंगे।
तेजस एमके-1ए की देरी पर चिंता
एलसीए एमके-1ए भारत में डिजाइन विकसित और बनाया जा रहा फोर प्लस पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। रक्षा मंत्रालय ने 2021 में HAL के साथ 48000 करोड़ रुपये में 83 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमान खरीद का सौदा किया था। इस सौदे के अनुसार मार्च 2024 में पहला विमान मिल जाना था लेकिन अभी तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं मिला है। भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की 42 स्क्वाड्रन होनी चाहिए लेकिन इस समय उसके पास महज 29 स्क्वाड्रन हैं। एयर चीफ मार्शल सिंह ने इस अंतर को गंभीर चुनौती बताया और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
एमके-2 और राफेल खरीद पर जोर
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि वायुसेना एलसीए एमके-2 विमान बनाने के कार्यक्रम की पक्षधर है साथ ही 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद भी जरूरी मानती है। इसी के साथ वायुसेना मध्यम क्षमता वाले परिवहन विमान मध्यम क्षमता वाले हेलीकाप्टर और अन्य संसाधनों की खरीद को भी जरूरी मानती है। इनकी खरीद से संबंधित समझौतों पर इसी वित्त वर्ष या अगले वित्त वर्ष में हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है। स्क्वाड्रन संख्या बढ़ाने और आधुनिक प्लेटफॉर्म शामिल करने को वायुसेना की प्राथमिकता बताया गया।
सी-295 परिवहन विमान की प्रगति
मध्यम श्रेणी के परिवहन विमान सी-295 की खरीद का सौदा फ्रांस की कंपनी एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के साथ हुआ है। भारतीय वायुसेना में पहला सी-295 विमान सितंबर 2023 में शामिल हुआ था। ऐसे 16 विमान तैयार स्थिति में भारत को मिलेंगे जबकि 17वां विमान भारत में बनेगा। इसके लिए फ्रांस की कंपनी ने भारतीय कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ समझौता किया है। दोनों कंपनियां मिलकर भारत में 40 विमान बनाएंगी। यह सौदा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भविष्य की तैयारियों पर बल
वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि बदलती तकनीक और सामरिक चुनौतियों के बीच आधुनिकीकरण की गति बढ़ाना अपरिहार्य है। 29 स्क्वाड्रन की मौजूदा संख्या को 42 तक पहुंचाने के लिए तेजस राफेल और अन्य प्लेटफॉर्मों की समय पर आपूर्ति जरूरी है। HAL के साथ निरंतर संपर्क और वित्त वर्ष में अपेक्षित डिलीवरी पर भरोसा जताया गया। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के इस बयान ने वायुसेना की वर्तमान स्थिति और भविष्य की जरूरतों दोनों को रेखांकित किया है। 94वीं वर्षगांठ के मौके पर दिया गया यह संदेश आत्मनिर्भरता और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है।