नई दिल्ली/कोलकाता: भारत में अब 'डिजिटल क्रांति' का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। देश की आगामी जनगणना (Census 2027) अब बंडलों में दबे कागजों, फाइलों और दस्तावेजों के पारंपरिक झंझट से पूरी तरह मुक्त होगी। केंद्र सरकार के एक बड़े कदम के तहत आगामी जनगणना पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट की जा रही है, जिससे डेटा जुटाने की प्रक्रिया न सिर्फ तेज होगी बल्कि पूरी तरह सटीक भी रहेगी।
1 से 15 अगस्त तक 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' का मौका
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आम नागरिक अब घर बैठे अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर के जरिए जनगणना में हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए सरकार द्वारा se.census.gov.in पोर्टल लाइव किया जाएगा।तारीख: आगामी 1 अगस्त से 15 अगस्त के बीच देश का कोई भी नागरिक इस पोर्टल पर जाकर खुद को पंजीकृत कर सकता है।
प्रक्रिया: पोर्टल पर अपना वैध मोबाइल नंबर डालने के बाद वेरिफिकेशन के लिए एक ओटीपी (OTP) आएगा। ओटीपी दर्ज करते ही लॉगिन हो जाएगा, जिसके बाद नागरिकों को 33 बेहद आसान सवालों की एक डिजिटल प्रश्नावली (Digital Questionnaire) भरनी होगी।
जो ऑनलाइन नहीं करेंगे, उनके घर आएगा 'HLO' ऐप
जो लोग डिजिटल माध्यम से इस प्रक्रिया को पूरा करने में असमर्थ होंगे या जो इस 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' का हिस्सा नहीं बनेंगे, उनके लिए फील्ड स्तर पर सरकारी कर्मचारी काम करेंगे।
हाउस लिस्टिंग (16 अगस्त - 14 सितंबर): छूटे हुए घरों को चिह्नित करने के लिए 16 अगस्त से 14 सितंबर तक 'हाउस लिस्टिंग' की प्रक्रिया चलेगी।
घर-घर वेरिफिकेशन: इसके बाद विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मी घर-घर जाकर डेटा जुटाएंगे। यह काम फरवरी 2027 तक चलेगा।
हथियार बनेगा स्मार्टफोन: प्रगणकों (Enumerators) के पास कोई कागज नहीं होगा, बल्कि उनके स्मार्टफोन में एक विशेष मोबाइल ऐप होगा, जिसका आधिकारिक नाम 'HLO' है। इसी ऐप के जरिए सारा डेटा रियल-टाइम में फीड किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल में भी तैयारियां तेज
देश के अन्य राज्यों में इस प्रक्रिया से जुड़ी शुरुआती कड़ियाँ पहले ही शुरू हो चुकी थीं, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से पश्चिम बंगाल में इसमें देरी देखी गई थी। अब राज्य में प्रशासनिक बदलावों के बाद इस महा-अभियान को गति दे दी गई है। पूरे पश्चिम बंगाल में करीब 1.5 लाख से अधिक विशेष रूप से प्रशिक्षित एन्यूमरेटर इस काम में उतारे जा रहे हैं।
इस बड़े अभियान के लिए इसी महीने से प्रशासनिक अधिकारियों (BDO और डिप्टी मजिस्ट्रेट) का प्रशिक्षण शुरू हो रहा है। इसके बाद 7 जुलाई से 12 जुलाई के बीच 'फील्ड ट्रेनर्स' को ट्रेनिंग दी जाएगी, जो बाद में बूथ स्तर के कर्मियों को 'HLO' ऐप और तकनीकी बारीकियों का पाठ पढ़ाएंगे।
हाईटेक मॉनिटरिंग रूम से रखी जाएगी नजर
इस पूरी व्यवस्था की रीयल-टाइम निगरानी के लिए हर जिले में 'डेdedicated सेंसस मॉनिटरिंग रूम' (Dedicated Census Monitoring Room) स्थापित किए जा रहे हैं। पुरुलिया जिले में इस तरह का आधुनिक रूम काम करना शुरू भी कर चुका है।
पुरुलिया के जिला मजिस्ट्रेट सुधीर कोन्थम ने इस डिजिटल पहल की सराहना करते हुए कहा, "कागज-कलम की जटिलताओं को दरकिनार कर देश की जनता का सटीक और तीव्र सांख्यिकी डेटा सामने लाना ही इस डिजिटल जनगणना का मुख्य उद्देश्य है। इस काम में ये हाईटेक मॉनिटरिंग रूम बेहद मददगार साबित होंगे।"*
इस मॉनिटरिंग रूम के जरिए जिलों के अंतिम छोर से आने वाला हर अपडेट सीधे CMMS (कंप्यूटरलाइज्ड मेंटेनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा, जिससे मानवीय त्रुटि (Human Error) की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।