उत्तराखंड के रास्ते होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। इस वर्ष यात्रा का पहला तीर्थयात्री जत्था 4 जुलाई को उत्तराखंड पहुंचेगा। इसके बाद कुल 10 जत्थे लिपुलेख मार्ग से यात्रा करेंगे जिनमें प्रत्येक दल में 50-50 श्रद्धालु शामिल होंगे।
38 किलोमीटर की पैदल यात्रा
इस बार यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सुगम बनाया गया है। श्रद्धालुओं को केवल 38 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होगी जबकि शेष दूरी वाहनों के माध्यम से तय की जाएगी। प्रशासन की ओर से यात्रा मार्ग पर सुरक्षा स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
प्रदेश के धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि यह यात्रा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लिपुलेख दर्रे के ऊपरी हिस्से से श्रद्धालु बिना चीनी वीजा और पासपोर्ट के भी कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकेंगे जो इस यात्रा की एक विशेषता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके दर्शन
उन्होंने यह भी बताया कि आदि कैलाश जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दर्शन कर चुके हैं कैलाश पर्वत का एक छोटा स्वरूप माना जाता है और यह भी यात्रा का प्रमुख आकर्षण है। इसके अलावा ओम पर्वत के दर्शन भी श्रद्धालुओं को प्राप्त होंगे जो इस मार्ग को और अधिक पवित्र बनाते हैं।
सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड से कैलाश मानसरोवर यात्रा लिपुलेख मार्ग से आगे बढ़ेगी और यह देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य अनुभव साबित होगी।