नई दिल्ली. भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत की थी, लेकिन अब तक इसकी प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही है। National Green Hydrogen Mission के तहत वर्ष 2030 तक 50 लाख टन प्रतिवर्ष उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जबकि फरवरी तक केवल लगभग 8,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता ही स्थापित हो पाई है। यह कुल लक्ष्य का मात्र 0.16 प्रतिशत है, जो इस मिशन की धीमी गति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
बजट आवंटन और उपयोग में बड़ा अंतर
इस मिशन के अंतर्गत आवंटित बजट और उसके उपयोग के बीच भी बड़ा अंतर देखने को मिला है। वर्ष 2025-26 में संशोधित अनुमान के अनुसार 300 करोड़ रुपये में से लगभग 68 प्रतिशत राशि का उपयोग हुआ, जो पिछले वर्षों की तुलना में सुधार तो है, लेकिन अभी भी अपेक्षाओं से कम है। इससे पहले वर्ष 2024-25 में केवल 15 प्रतिशत और 2023-24 में तो लगभग नगण्य राशि ही खर्च हो पाई थी। यह स्थिति बताती है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गति की कमी बनी हुई है।
योजना और क्रियान्वयन के बीच असंतुलन
बजट अनुमान और संशोधित अनुमानों के बीच लगातार हो रही कटौती यह संकेत देती है कि योजना निर्माण और उसके वास्तविक कार्यान्वयन के बीच तालमेल की कमी है। प्रारंभिक बजट में जहां अधिक राशि निर्धारित की जाती है, वहीं बाद में उसे घटाकर कम कर दिया जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि या तो परियोजनाओं की गति धीमी है या फिर उनकी तैयारी पूरी तरह से सुदृढ़ नहीं है।
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य पर प्रभाव
ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है, जो पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता को कम कर सकता है। लेकिन इसकी धीमी प्रगति भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्यों को प्रभावित कर सकती है। यदि समय रहते इस मिशन को गति नहीं दी गई, तो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत पीछे रह सकता है, जबकि अन्य देश इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
नीतिगत सुधार और तेज क्रियान्वयन की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिशन को सफल बनाने के लिए नीतिगत स्पष्टता, निवेश में वृद्धि और तकनीकी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है। साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना और परियोजनाओं की समयबद्ध निगरानी करना भी जरूरी होगा। इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतिया
हालांकि वर्तमान स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन संभावनाएं अभी भी मजबूत हैं। यदि योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए, तो भारत इस मिशन को सफलता की दिशा में ले जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और उद्योग जगत मिलकर इस क्षेत्र में किस प्रकार नई ऊर्जा का संचार करते हैं।