नई दिल्ली - देश में खुदरा महंगाई (रिटेल इंफ्लेशन) ने जून महीने में एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मई महीने में यह 3.93 प्रतिशत दर्ज की गई थी। करीब आधा प्रतिशत की यह बढ़ोतरी आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक परिस्थितियों का असर महंगाई पर और अधिक देखने को मिल सकता है।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल बना बड़ी वजह
जून में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में आई तेजी रही। सब्जियां, दालें, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर पड़ा। खाद्य महंगाई बढ़ने से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की स्थिति और कृषि उत्पादन आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों को प्रभावित करेंगे।
ईरान-अमेरिका तनाव का भी दिखा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर परिवहन लागत और अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है। यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर भारत सहित कई देशों की महंगाई दर पर देखने को मिल सकता है।
RBI की नीति पर रहेगी नजर
हालांकि खुदरा महंगाई अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित लक्ष्य दायरे के भीतर बनी हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को प्रभावित कर सकती है। यदि आने वाले महीनों में महंगाई में और तेजी आती है तो ब्याज दरों को लेकर आरबीआई को नए फैसले लेने पड़ सकते हैं। फिलहाल केंद्रीय बैंक महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।
आम लोगों पर बढ़ेगा असर
महंगाई में वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है। रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुएं महंगी होने से घरेलू खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को अपने मासिक बजट में बदलाव करना पड़ सकता है। सरकार भी महंगाई पर नियंत्रण रखने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले महीनों में वैश्विक हालात, मानसून और घरेलू उत्पादन महंगाई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।