जबलपुर। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामले में मंगलवार को हाई कोर्ट की स्पेशल बेंच सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट से वापस भेजी गई 91 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी। पिछले सात वर्षों से लंबित इस मामले का असर प्रदेश की कई सरकारी भर्तियों और लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ा है।
सात साल पुराने विवाद पर आज सुनवाई
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की स्पेशल बेंच मंगलवार को 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से संबंधित 91 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ की विशेष पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। यह मामला पिछले सात वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट लौटीं 91 याचिकाएं
इस मामले से जुड़ी सभी 91 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट से वापस मध्य प्रदेश हाई कोर्ट भेजी गई हैं। अब हाई कोर्ट इन सभी मामलों की एक साथ सुनवाई कर आगे की कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई की दिशा तय करेगा।
क्या है 27% ओबीसी आरक्षण विवाद?
विवाद की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई, जब मध्य प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया। इस फैसले को विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई भर्ती प्रक्रियाओं में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लाभ पर अंतरिम रोक लगा दी, जिससे अनेक सरकारी भर्तियां और चयन प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं।
लाखों अभ्यर्थियों और भर्तियों पर असर
ओबीसी आरक्षण विवाद के कारण प्रदेश की कई सरकारी भर्ती परीक्षाएं और नियुक्तियां वर्षों से प्रभावित हैं। इस वजह से लाखों अभ्यर्थियों को अंतिम चयन और नियुक्ति का इंतजार करना पड़ रहा है। राज्य सरकार और विभिन्न कर्मचारी संगठनों की भी इस सुनवाई पर नजर बनी हुई है।
अंतरिम आदेश पर रहेगी सबकी नजर
आज की सुनवाई में विशेष पीठ यह तय कर सकती है कि आगे मामले की सुनवाई किस तरह होगी और अंतरिम आदेशों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं। इसी कारण यह सुनवाई प्रदेश के अभ्यर्थियों और सरकारी भर्तियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।