दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, भाजपा जिला अध्यक्ष और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उनके साथ मौजूद रहे। नामांकन से पहले भाजपा ने शहर में शक्ति प्रदर्शन किया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। रैली के जरिए पार्टी ने चुनावी माहौल में अपनी एकजुटता और संगठनात्मक ताकत का संदेश देने की कोशिश की।
टिकट बदलने के फैसले ने मचा दिया था सियासी घमासान
दतिया सीट पर भाजपा उम्मीदवार की घोषणा से पहले पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। उन्होंने चुनावी तैयारियां भी शुरू कर दी थीं और नामांकन पत्र तक खरीद लिया था। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने अंतिम समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े वरिष्ठ संगठनकर्ता आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर सभी को चौंका दिया। संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले तिवारी पहली बार विधानसभा चुनावी मैदान में उतरे हैं। भाजपा के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया।
समर्थकों के विरोध ने बढ़ाई थी भाजपा की मुश्किलें
आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। कई समर्थक सड़कों पर उतर आए, महिलाओं ने सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया, पार्टी पदाधिकारियों ने इस्तीफे की घोषणा की और भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ नारेबाजी की। विरोध के चलते ग्वालियर-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग भी कुछ समय के लिए बाधित रहा। बाद में प्रदर्शन उग्र होकर पत्थरबाजी और पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया, जिससे यह मामला भाजपा के लिए राजनीतिक और कानून-व्यवस्था दोनों स्तर पर चुनौती बन गया। हालांकि पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हो गई।
नरोत्तम मिश्रा की मौजूदगी ने दिए एकजुटता के संकेत
नामांकन के दौरान पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा स्वयं मुख्यमंत्री के साथ मंच पर मौजूद रहे और आशुतोष तिवारी के समर्थन में दिखाई दिए। इसे भाजपा की ओर से संगठनात्मक एकजुटता का बड़ा संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मिश्रा की सक्रिय मौजूदगी कार्यकर्ताओं के बीच बने असंतोष को कम करने और चुनाव में पार्टी को मजबूती देने की रणनीति का हिस्सा है। इससे यह संकेत भी गया कि पार्टी नेतृत्व उपचुनाव में किसी तरह की अंदरूनी खींचतान को चुनावी नुकसान में बदलने नहीं देना चाहता।
कांग्रेस ने भी दिखाई ताकत, घनश्याम सिंह ने भरा पर्चा
भाजपा प्रत्याशी के नामांकन से पहले कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भी अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके साथ मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस ने भी इस अवसर को शक्ति प्रदर्शन के रूप में इस्तेमाल करते हुए भाजपा को कड़ी चुनौती देने का संदेश दिया। पार्टी का दावा है कि दतिया की जनता इस बार बदलाव के पक्ष में मतदान करेगी।
दतिया में दिलचस्प मुकाबले के संकेत
दतिया विधानसभा उपचुनाव अब प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। एक ओर भाजपा संगठन की ताकत और सरकार के चेहरे के साथ मैदान में है, वहीं कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और सत्ता विरोधी माहौल को चुनावी हथियार बनाने की कोशिश कर रही है। भाजपा के भीतर टिकट को लेकर हुए विवाद के बावजूद अब पार्टी पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतर चुकी है। ऐसे में आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच मुकाबला बेहद रोचक होने की उम्मीद है और इस सीट पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी रहेंगी।