नई दिल्ली. भारतीय सेना ने बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के बीच अपनी रणनीति को नई दिशा देने का संकेत दिया है। उच्चस्तरीय सैन्य सम्मेलन के बाद सेना ने वर्ष 2026 को ‘नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी’ के रूप में मनाने की घोषणा की है, जो आधुनिक युद्ध प्रणाली में तकनीकी समन्वय और सूचना आधारित निर्णयों की भूमिका को और मजबूत करेगा।
सीमा सुरक्षा पर व्यापक मंथन
नई दिल्ली में आयोजित सैन्य कमांडरों के सम्मेलन में चीन और पाकिस्तान के साथ लगी सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियों की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान हालिया अभियानों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर भविष्य की रणनीतियों को और सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया गया, ताकि किसी भी परिस्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
‘फ्यूचर रेडी फोर्स’ की दिशा में कदम
भारतीय सेना ने अपने ‘फ्यूचर रेडी फोर्स’ के दृष्टिकोण के अनुरूप यह निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य सेना को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है, ताकि आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप तेजी से अनुकूलन किया जा सके। डाटा आधारित निर्णय और नेटवर्किंग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यूएएस और काउंटर यूएएस पर जोर
सम्मेलन में मानव रहित हवाई प्रणाली (UAS) और उनके खिलाफ रक्षा तंत्र (C-UAS) के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इन प्रणालियों के प्रभावी उपयोग और नियंत्रण को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सुरक्षा क्षमताओं में वृद्धि होगी।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा
कमांडरों ने स्वदेशी सैन्य उपकरणों के उत्पादन को तेज करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह कदम न केवल देश की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि रक्षा उद्योग के विकास को भी नई गति देगा।
उच्च नेतृत्व की मौजूदगी में रणनीतिक चर्चा
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अध्यक्षता जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की। इसमें शीर्ष प्रशासनिक और सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया, जिससे स्पष्ट होता है कि यह निर्णय व्यापक विचार-विमर्श और रणनीतिक दृष्टिकोण के तहत लिया गया है।
तकनीकी युद्ध के युग में नई तैयारी
आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सूचना, नेटवर्क और तकनीकी समन्वय इसका प्रमुख आधार बन चुके हैं। ऐसे में ‘नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी’ वर्ष की घोषणा भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
सुरक्षा और तकनीक का समन्वय
यह पहल दर्शाती है कि भारत अपनी सुरक्षा नीति में तकनीक को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रहा है। इससे न केवल सेना की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि देश की समग्र सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक मजबूत और प्रभावी बनेगी।