कोलकाता. पश्चिम बंगाल विशेष कार्य बल (एसटीएफ) द्वारा गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी हमीम मंडल से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। एसटीएफ के महानिरीक्षक गौरव शर्मा के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में यह संकेत मिले हैं कि हाल ही में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी का उपयोग कर आतंकी हमला करने की कथित साजिश तैयार की गई थी। जांच एजेंसियां यह भी सत्यापित कर रही हैं कि संदिग्ध उस स्थान तक पहुंचा था अथवा नहीं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक आंदोलन या भीड़भाड़ वाले आयोजन को संभावित लक्ष्य बनाए जाने की आशंका राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए अत्यंत गंभीर विषय होती है और ऐसे मामलों में प्रत्येक सूचना का बहुस्तरीय सत्यापन किया जाता है।
संवेदनशील व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने के आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, संदिग्ध नेटवर्क का उद्देश्य केवल भीड़भाड़ वाले आयोजनों तक सीमित नहीं था, बल्कि कुछ प्रमुख जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की गतिविधियों की जानकारी एकत्र करने का प्रयास भी कथित रूप से किया जा रहा था। एसटीएफ का दावा है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सहित कुछ अन्य राजनीतिक नेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की आवाजाही तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों से संबंधित सूचनाएं जुटाने की जिम्मेदारी संदिग्ध को सौंपी गई थी। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क का सुराग एक अलग आपराधिक प्रकरण की जांच के दौरान मिला, जिसमें कथित अपहरण और फिरौती की साजिश की पड़ताल की जा रही थी। सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि आतंकी संगठन अक्सर संगठित आपराधिक गतिविधियों और स्थानीय नेटवर्क का उपयोग अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं, इसलिए ऐसी कड़ियों की विस्तृत जांच आवश्यक होती है।
महिला सहयोगी की गिरफ्तारी से जांच को मिला नया आयाम
जांच के क्रम में एसटीएफ ने संदिग्ध की महिला सहयोगी अर्पिता सरकार को झारखंड के साहिबगंज से गिरफ्तार किया है। एजेंसी का दावा है कि वह संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल की सक्रिय सदस्य के रूप में विभिन्न गतिविधियों में सहयोग कर रही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह एक महाविद्यालय में अंग्रेजी विषय की छात्रा रही है और लगभग चार वर्ष पूर्व इंटरनेट माध्यम से संदिग्ध के संपर्क में आई थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह कथित रूप से मोबाइल नंबर एकत्र करने, संभावित लक्ष्यों की तस्वीरें जुटाने, रेकी करने तथा इंटरनेट माध्यम से नए लोगों को नेटवर्क से जोड़ने जैसी गतिविधियों में सहयोग करती थी। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है और एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा अन्य दस्तावेजों का वैज्ञानिक परीक्षण कर रही हैं।
आमने-सामने पूछताछ और विदेशी संपर्कों की पड़ताल
अदालत द्वारा पुलिस हिरासत मिलने के बाद जांच एजेंसियां दोनों संदिग्धों से आमने-सामने पूछताछ की तैयारी कर रही हैं, ताकि उनके बयानों का मिलान किया जा सके और नेटवर्क की वास्तविक संरचना स्पष्ट हो सके। प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत भी मिलने का दावा किया गया है कि महिला सहयोगी के कुछ विदेशी संपर्क हो सकते हैं। अब जांच का प्रमुख केंद्र यह है कि इंटरनेट माध्यम से किन विदेशी संचालकों के साथ संपर्क स्थापित किया गया, कथित निर्देश किस प्रकार प्राप्त होते थे तथा पश्चिम बंगाल और झारखंड के रास्ते किसी प्रकार की संदिग्ध वित्तीय सहायता पहुंचाई गई या नहीं। वित्तीय लेनदेन, डिजिटल संचार और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों के तकनीकी सहयोग की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
डिजिटल नेटवर्क, एन्क्रिप्टेड एप और डार्क वेब की जांच
जांच अधिकारियों के अनुसार, संदिग्धों के बीच सामान्य दूरभाष कॉल के स्थान पर विशेष एन्क्रिप्टेड मोबाइल अनुप्रयोगों के माध्यम से संपर्क बनाए रखने के संकेत मिले हैं। दोनों के बीच हुए अनेक व्हाट्सएप संवादों से भी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं, जिनके आधार पर यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि दोनों को अलग-अलग प्रकार के कथित दायित्व सौंपे गए थे। अब एजेंसियां उनके डिजिटल नेटवर्क, डार्क वेब से संभावित संबंध, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच तथा विदेशी संपर्कों की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक आतंकी संगठन पहचान छिपाने के लिए एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों और गुप्त डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग करते हैं, जिससे जांच अधिक जटिल हो जाती है।
जांच अभी प्रारंभिक चरण में, अंतिम निष्कर्ष शेष
एसटीएफ ने इससे पहले पूर्व बर्द्धमान के एक आवासीय परिसर स्थित जिम से हमीम मंडल को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि उसके संपर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, कुख्यात अपराधी शहजाद भट्टी तथा पुलवामा आतंकी हमले के आरोपित सज्जाद भट्ट से जुड़े लोगों तक रहे हैं। हालांकि इन दावों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेनदेन तथा अन्य तकनीकी प्रमाणों के आधार पर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जांच पूरी होने, आरोपपत्र दाखिल होने और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही घटनाक्रम की अंतिम तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए फिलहाल एजेंसियों द्वारा सामने रखे गए दावों को जांच के दायरे में सामने आए प्रारंभिक निष्कर्षों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।