कोलकाता: राजधानी कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जमीन कब्जाने और धन शोधन से जुड़े गंभीर आरोपों में रियल एस्टेट व्यवसायी जय कामदार को गिरफ्तार कर लिया है। करीब छह घंटे तक चली लंबी और सघन पूछताछ के बाद उनके बयानों में कई असंगतियां सामने आने पर ईडी ने यह कदम उठाया। गिरफ्तारी की सूचना तुरंत उनके परिजनों, भाई और वकील को दे दी गई।
पूछताछ के बाद तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
गिरफ्तारी के बाद जब जय कामदार को अदालत ले जाया जा रहा था, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें तुरंत आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ट्रॉमा केयर यूनिट में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
पुलिस अधिकारी के आवास पर भी ईडी की छापेमारी
इसी कार्रवाई के तहत ईडी ने कोलकाता पुलिस के एक डीसी रैंक के अधिकारी के बालीगंज स्थित फर्न रोड वाले आवास पर भी छापा मारा। रविवार सुबह से ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी में ईडी टीम ने घर को घेर लिया था। बाद में दोपहर के समय अधिकारी के बेटे को भी ऑकलैंड स्क्वायर स्थित उसके कार्यालय ले जाया गया, जहां जांच आगे बढ़ाई गई।
1100 करोड़ के जमीन घोटाले का खुलासा
ईडी के अनुसार, जय कामदार पर करीब 1100 करोड़ रुपये के बड़े जमीन घोटाले में शामिल होने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि पिछले चार महीनों के भीतर ही विभिन्न बैंक खातों के जरिए लगभग 500 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। पूछताछ के दौरान आरोपी इन धनराशियों के स्रोत को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।
छापेमारी में करोड़ों की नकदी और दस्तावेज बरामद
इससे पहले 1 अप्रैल को हुई छापेमारी में ईडी को जय कामदार के ठिकानों से 1.47 करोड़ रुपये नकद और लगभग 67.64 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण मिले थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में जमीन से जुड़े दस्तावेज, सरकारी स्टांप पेपर, निर्माण परियोजनाओं के कागजात, साथ ही डिजिटल साक्ष्य जैसे व्हाट्सऐप चैट और ईमेल भी बरामद किए गए थे।
सिंडिकेट से जुड़े होने के आरोप
ईडी सूत्रों का दावा है कि जय कामदार एक ऐसे संगठित गिरोह का हिस्सा है जो जमीन कब्जाने, अवैध निर्माण, रंगदारी वसूली और दस्तावेजों की जालसाजी जैसे कार्यों में शामिल रहा है। आरोप यह भी है कि वह अपनी कंपनियों के जरिए काले धन को सफेद करने के नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
जांच में सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तारी
पूछताछ के दौरान आरोपी लगातार सवालों को टालता रहा और बैंकिंग लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। सहयोग न मिलने और सबूतों में विरोधाभास के चलते ईडी ने उसे गिरफ्तार करने का निर्णय लिया।