नई दिल्ली. देश में रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस नई योजना के तहत देशभर में लगभग 2500 किलोमीटर लंबा पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया जाएगा, जिससे एलपीजी आपूर्ति का स्वरूप पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। यह कदम न केवल सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक सिद्ध होगा।
नियामक बोर्ड की पहल से नई दिशा
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड ने इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत करते हुए बताया कि नई पाइपलाइनों के जरिए रिफाइनरियों, आयात टर्मिनलों और बॉटलिंग संयंत्रों को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे एलपीजी की आपूर्ति अधिक सुगम और निरंतर हो सकेगी।
आपूर्ति तंत्र में आएगा बड़ा बदलाव
नई पाइपलाइन व्यवस्था के माध्यम से गैस की आपूर्ति सीधे स्रोत से संयंत्रों तक पहुंचाई जाएगी। इससे परिवहन में लगने वाला समय कम होगा और आपूर्ति में होने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकेगा। साथ ही ये पाइपलाइनें जरूरत पड़ने पर भंडारण का कार्य भी करेंगी, जिससे आपूर्ति की सुरक्षा और मजबूत होगी।
चार प्रमुख परियोजनाओं पर शुरू हुआ काम
वर्तमान में चार प्रमुख पाइपलाइन परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है, जिनमें चेरलापल्ली से नागपुर, शिकरापुर से हूबली-गोवा, पारादीप से रायपुर और झांसी से सितारगंज तक के मार्ग शामिल हैं। ये परियोजनाएं देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ते हुए आपूर्ति श्रृंखला को व्यापक बनाएंगी।
निवेश और विस्तार की बड़ी योजना
इस पूरी परियोजना में लगभग 12,500 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। वर्तमान में देश में एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क करीब 8000 किलोमीटर तक सीमित है, जो इस नई योजना के बाद काफी विस्तृत हो जाएगा। इससे ऊर्जा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।
सुरक्षा और पर्यावरण को मिलेगा लाभ
सड़क मार्ग से एलपीजी टैंकरों की आवाजाही कम होने से दुर्घटनाओं का खतरा घटेगा। पाइपलाइन के माध्यम से गैस परिवहन अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय माना जाता है। इसके साथ ही ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी, जो पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
लागत में कमी और दक्षता में वृद्धि
पाइपलाइन के जरिए एलपीजी परिवहन से लागत में कमी आएगी और समय की बचत होगी। इससे उपभोक्ताओं को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। साथ ही आपूर्ति प्रणाली अधिक कुशल और टिकाऊ बन सकेगी।
ऊर्जा क्षेत्र में नए युग की शुरुआत
यह पहल देश में ऊर्जा आपूर्ति के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है। सुरक्षित, सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल आपूर्ति व्यवस्था की दिशा में यह कदम भविष्य के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा।