महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में गतिरोध के बाद अब सियासी टकराव और तेज हो गया है। विपक्षी दल प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर पुराने महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू करने की मांग करने जा रहे हैं।
PM को पत्र, पुराना बिल लागू करने की मांग
सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के दल एक संयुक्त पत्र के जरिए सरकार पर दबाव बनाएंगे। उनका कहना है कि वे महिला आरक्षण के पूरी तरह पक्ष में हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत है। विपक्ष देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह संदेश भी देने की तैयारी में है कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में राजनीतिक समीकरण बदलना चाहती है।
लोकसभा में क्यों गिरा बिल?
हाल ही में लोकसभा में ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ पास नहीं हो सका।
बिल के पक्ष में: 298 वोट
विरोध में: 230 वोट
जरूरी बहुमत: दो-तिहाई
Om Birla ने बिल के गिरने की पुष्टि की। सरकार ने इस बिल को परिसीमन से जोड़कर पेश किया था, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई।
विपक्ष का क्या है तर्क?
Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi समेत कई नेताओं का कहना है कि:
वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं
लेकिन परिसीमन के साथ इसे जोड़ना चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है
2023 वाला पुराना बिल तुरंत लागू किया जाए
प्रियंका गांधी ने सरकार से अपील की है कि सहमति वाले पुराने बिल को संसद में लाकर पास कराया जाए, विपक्ष पूरा समर्थन देगा।
सरकार का जवाब
गृह मंत्री Amit Shah ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले ऐतिहासिक सुधार को रोक रहे हैं। वहीं संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने संकेत दिए हैं कि सरकार फिलहाल इससे जुड़े अन्य विधेयकों पर आगे नहीं बढ़ेगी।
क्या है पूरा विवाद?
सरकार: महिला आरक्षण + परिसीमन साथ में लागू
विपक्ष: पहले आरक्षण लागू हो, परिसीमन बाद में
नतीजा: बिल बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गया
यह पूरा मामला महिला सशक्तिकरण से ज्यादा अब राजनीतिक रणनीति बनाम प्रक्रिया की बहस बन चुका है। महिला आरक्षण पर सहमति होने के बावजूद, इसे लागू करने के तरीके पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार विपक्ष की मांग मानकर पुराना बिल लाएगी या टकराव और बढ़ेगा।