नई दिल्ली - महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल से 19 अप्रैल तक तीन दिन का विशेष संसद सत्र बुलाया है। सरकार का उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी प्रक्रियात्मक और विधायी बाधाओं को दूर करना बताया जा रहा है, ताकि इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू किया जा सके।
कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
इस बीच सत्र से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे “भ्रामक” बताया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर महिलाओं के मुद्दे को लंबे समय तक नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। वहीं, दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने परिसीमन के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए विरोध दर्ज कराया है, जिनमें रेवंत रेड्डी और एम. के. स्टालिन के बयान भी सामने आए हैं।
पीएम मोदी ने महिलाओं के नाम एक खुला पत्र लिखा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर देश की महिलाओं के नाम एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि यदि 2029 तक लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू होता है, तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत एवं समावेशी बनेगा। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि नीति निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी “विकसित भारत” की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 होगी
सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है। इसी तरह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों का विस्तार किया जाएगा।
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया की मंशा और समय-सीमा को लेकर स्पष्टता जरूरी है, क्योंकि यदि किसी विधेयक को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है तो इससे संसदीय लोकतंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।