इंफाल. मणिपुर के इंफाल में गुरुवार को फूड पॉइजनिंग की आशंका के चलते सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के 84 जवानों और तीन नागरिक ड्राइवरों को रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी आरआईएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार जवानों की तबीयत बिगड़ने की वास्तविक वजह का पता लैब जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। आरआईएमएस अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. एम. रामेश्वर ने मीडिया को बताया कि फिलहाल किसी भी मरीज की हालत गंभीर नहीं है। जवानों को आपातकालीन विभाग में तत्काल उपचार दिया गया और अब उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। घटना ने सुरक्षा बलों के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। संबंधित अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है।
कहां तैनात थे प्रभावित जवान
अस्पताल में भर्ती जवान बीएसएफ की 58वीं बटालियन की डेल्टा कंपनी के हैं। ये जवान बुधवार को दीमापुर से इंफाल पहुंचे थे। फिलहाल उन्हें इंफाल पश्चिम जिले में एक अस्थायी आश्रय स्थल पर ठहराया गया था। उन्होंने सुबह करीब साढ़े आठ बजे नाश्ते में पूड़ी और आलू की सब्जी खाई थी जिसके बाद उन्हें उल्टियां होने लगीं। नाश्ते के कुछ ही घंटों में लक्षण दिखाई देने लगे जिससे फूड पॉइजनिंग की आशंका प्रबल हो गई। जवानों को दोपहर करीब एक बजे आरआईएमएस अस्पताल लाया गया। अस्थायी आश्रय स्थल पर खाद्य व्यवस्था की जांच अब चल रही है। इस घटना ने तैनाती के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल में उपचार और हालत
आरआईएमएस अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि बीएसएफ के जवानों को आपातकालीन विभाग में तत्काल उपचार दिया गया और अब उनकी हालत स्थिर है। संदिग्ध तौर पर खाद्य विषाक्तता के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी। प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक एम. रामेश्वर ने पत्रकारों से कहा कि उनकी तबीयत और खराब होने के कोई संकेत नहीं हैं। जांच की जा रही है। सभी मरीजों की निगरानी जारी है और चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए है। अस्पताल प्रशासन ने आवश्यक दवाएं और देखभाल उपलब्ध कराई है। जवानों की हालत स्थिर होने से राहत की बात कही जा रही है। आगे की चिकित्सा रिपोर्ट का इंतजार है।
खाने के सैंपल जांच के लिए भेजे गए
घटना के बाद राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों और इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम की एक टीम ने उस जगह का दौरा किया जहां बीएसएफ के जवान तैनात हैं। खाद्य सुरक्षा टीम ने वहां तैयार किए गए खाने के नमूने एकत्र किए और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया। एक अधिकारी के मुताबिक फूड पॉइजनिंग की आशंका के पीछे की वास्तविक वजह का पता लैब जांच के नतीजे आने के बाद ही चल पाएगा। फिलहाल खाने के नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। टीम ने आश्रय स्थल की स्वच्छता और खाद्य तैयारी प्रक्रिया की भी जांच की। रिपोर्ट आने तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। जांच एजेंसियां पूरी गंभीरता से मामला देख रही हैं।
मुख्यमंत्री ने जताई चिंता
मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने अस्पताल में भर्ती जवानों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि हमारे सुरक्षा कर्मियों का स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है। मैं सभी प्रभावित जवानों के जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना करता हूं। संबंधित अधिकारियों से आग्रह है कि उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाए। मुख्यमंत्री के बयान से राज्य सरकार की संवेदनशीलता झलकती है। उन्होंने अधिकारियों को बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा बलों के स्वास्थ्य को लेकर उच्च स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है।
जांच प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग और स्वास्थ्य अधिकारियों की संयुक्त टीम घटना स्थल पर पहुंचकर विस्तृत जांच कर रही है। खाने के नमूनों के अलावा पानी और अन्य संभावित स्रोतों की भी जांच की जा रही है। लैब रिपोर्ट आने के बाद वास्तविक कारण सामने आएगा। बीएसएफ प्रशासन भी आंतरिक जांच कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं। अस्थायी आश्रय स्थल पर खाद्य व्यवस्था को और सख्त बनाने के उपाय किए जा सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी रखे हुए है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
सुरक्षा बलों के स्वास्थ्य पर ध्यान
इस घटना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा की महत्ता को रेखांकित किया है। जवानों की हालत स्थिर होने से राहत मिली है लेकिन जांच रिपोर्ट का इंतजार जारी है। राज्य सरकार और बीएसएफ प्रशासन दोनों मिलकर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। प्रभावित जवानों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की जा रही है। इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए सख्त दिशानिर्देश और नियमित जांच की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा बलों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए आगे की व्यवस्थाएं मजबूत की जाएंगी।